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New Labour Code : अब हफ्ते में 3 दिन मिलेगी छुट्टी, 4 ही दिन करना होगा काम

अब हफ्ते में 3 दिन मिलेगी छुट्टी, 4 ही दिन करना होगा काम

डेस्क:
केंन्द सरकार 1 जुलाई यानि कल से नया श्रम कानून ला सकती है। अगर कल से यह लागू हुआ तो इन-हैंड सैलरी, वर्किंग ऑवर, कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) योगदान और एनुअल लीव में बड़े बदलाव हो सकते हैं। हालांकि, अभी तक इस कड़ी में कोई ऑफिशियल नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है। वहीं सरकार का मानना है कि इन कानूनों से देश में निवेश को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।


29 कानून में सुधार और 4 नए कोड में शामिल किए गए
दरअसल, संसद ने हाल ही में नए श्रम कानून पारित किए, जिसके जरिए कर्मचारियों के वर्किंग ऑवर, पेड लीव और हर सेक्टर में बहुत कुछ बदलाव हो सकते हैं। संसद ने 29 कानूनों में सुधार किए हैं और इन्हें 4 नए कोड में शामिल कर दिया है। इसे भारत के श्रम कानूनों की यात्रा में एक क्रांतिकारी कदम के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि ये भारतीय कंपनियों के लिए एक प्रगतिशील कदम हो सकता है। हफ्ते में सिर्फ 4 दिन काम करना होगा। वहीं, आपका पीएफ कॉन्ट्रीब्यूशन भी बढ़ जाएगा। लेकिन इस नियम के लागू होने के बाद इन हैंड सैलरी कम हो जाएगी। आइए जानते हैं कि नए श्रम कानून के लागू होने के बाद क्या कुछ बदल जाएगा? 

Working Hour, Week Off में क्या होंगे बदलाव
नए श्रम कानूनों के तहत कर्मचारियों को हफ्ते में पांच दिनों के बजाय 4 दिन ही काम करना होगा। हालांकि, इन 4 दिनों के दौरान कर्मचारियों को हर दिन 12 घंटे तक काम करना होगा। वर्तमान में एक दिन में सात से 8 घंटे ही काम करना होता है। श्रम मंत्रालय ने पहले ही इस बात को स्पष्ट कर दिया था कि जब भी नए कानून लागू होंगे, कर्मचारियों को हफ्ते में 48 घंटे काम करने के नियम का पालन करना होगा। हालांकि, हफ्ते में चार दिन काम करने का मतलब है कि लोगों को सप्ताह में तीन दिन की छुट्टियां मिलेंगी।


नए श्रम कानून में सैलरी का नियम
अगर कर्मचारियों के दृष्टिकोण से समझें तो श्रम कानून के लागू होना उनके लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। दरअसल, इसके लागू होते ही इन-हैंड सैलरी  में कटौती होगी, जो एक लिहाज से कर्मचारियों के लिए छोटी अवधि में घाटे का सौदा साबित होता है। हालांकि, अगर इसका दूसरा पहलू समझा जाए, तो वो लंबी अवधि में फायदे वाला साबित होता है। नए नियमों के तहत कंपनियों को भविष्य निधि में अधिक पैसा जमा कराने की जिम्मेदारी उठानी पड़ेगी। नए नियमों के प्रावधान के मुताबिक, कर्मचारियों की ग्रॉस सैलरी 50% होनी चाहिए। इसके कर्मचारी और कंपनी का पीएफ योगदान बढ़ जाएगा।

2021 में पहले लागू किया जाना था
बता दें, पहले इसे एक अक्टूबर 2021 को ही लागू किया जाना था। लेकिन तब 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव को देखते हुए केन्द्र सरकार ने लागू नहीं किया था। ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार 1 जुलाई से इसे लागू कर सकती है। हालांकि, ये सब अभी अटकलें ही हैं। सरकार की तरफ से इसे लागू करने को लेकर कोई ऐलान नहीं किया गया है।