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फैसला : अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के 10 महीने पूरे, भारत ने दोबारा खोला अपना दूतावास 

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डेस्क:
अफ़ग़ानिस्तान में तख्ता पलट हुए 10 महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है। ऐसे में रूस, चीन, पकिस्तान समेत 14 देशों के बाद भारत ने भी अपना दूतावास अफगानिस्तान में खोलने का निर्णय किया है। अफ़ग़ानिस्तान में अपनी उपस्थिति को दोबारा से बनाने की दिशा में गुरुवार को भारत ने एक अहम क़दम उठाया।  भारत ने काबुल में अपने दूतावास में एक तकनीकी टीम की तैनाती की है और अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी में एक बार फिर से अपनी राजनयिक उपस्थिति स्थापित की है।बीते साल अगस्त महीने में हुए तख़्तापलट और तालिबान के नियंत्रण के बाद से ही भारत समेत दुनिया के कई देशों ने अपने दूतावास अफ़ग़ानिस्तान में बंद कर दिए थे। 


भूकंप से हुई तबाही,भारत ने भेजी सहायता की पहली खेप 
बुधवार को अफ़ग़ानिस्तान मे आए भूकंप और उससे हुए भारी नुक़सान को देखते हुए भारत की ओर से सहायता की पहली खेप अफगानिस्तान भेजी गई है।  भूकंप की तीव्रता अधिक होने के कारण अब तक इससे कम से कम 1000 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की जा चुकी है। 


भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से किया गया दौरा 
2 जून को भारतीय विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव जेपी सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल का दौरा किया था।  अफ़ग़ानिस्तान में पिछले साल तालिबान की सरकार बनने के बाद से भारत के किसी सरकारी दल का ये पहला काबुल दौरा था। जेपी सिंह के नेतृत्व में इस शिष्टमंडल ने तालिबान के विदेश मंत्री आमिर ख़ान मुतक्क़ी से मुलाक़ात की थी। मिली जानकारी के अनुसार भारत ने अफगानिस्तान में सुरक्षा और इंजीनियरिंग वर्कर्स की एक टीम को काबुल भेजा गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य वहां काउंसलिंग और वीज़ा सुविधा को दोबारा से पटरी पर लाना है। भारत से पहले रूस, चीन, पाकिस्तान, तुर्की, क़तर, ईरान,सऊदी अरब, इंडोनेशिया, यूरोपीय संघ पहले ही वहाँ दूतावास को दोबारा से संचालित कर रहे हैं।