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मध्य प्रदेश : महज 21 साल की उम्र में सरपंच बनी लक्षिका डागर, रेडियो जॉकी से सरपंच तक का कैसा रहा सफर..

महज 21 साल की उम्र में सरपंच बनी लक्षिका डागर, रेडियो जॉकी से सरपंच तक का कैसा रहा सफर..

डेस्क:
उज्जैन ज़िले की चिंतामन-जवासिया ग्राम पंचायत की लक्षिका डागर ने महज 21 साल की उम्र में सरपंच चुनी गई है। लक्षिका ने चुनाव जीतकर युवाओं के राजनीति में बढ़ती अरूचि के बीच खुद के जरिए मिशाल पेश की है। इस उम्र में अधिकांश लोग ज़िंदगी में क्या करना है, इस बात को लेकर पसोपेश में रहते हैं।  वही लक्षिका ने 21 की उम्र में एक मुक़ाम पा लिया है।

 

कम उम्र मगर हौसलें बुलंद 
नवनिर्वाचित लक्षिका मानती हैं कि जीत के आगे उनकी यह सफर आसान नहीं होगी। मगर वह चाहती हैं कि उन्होंने अपने लोगों से जो वादे किए हैं, उन्हें वह पूरा कर सकें। लक्षिका ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि "उम्र में कम होने की वजह से उन्हें पद संभालने को लेकर थोड़ी झिझक ज़रूर है लेकिन वो कोशिश करेंगी कि सभी के सहयोग से वो अपने लक्ष्य को पूरे कर सकें."

 

दादा रहे हैं सरपंच और लक्षिका रेडियो जॉकी 
लक्षिका इस समय उज्जैन के भारतीय इंस्टीट्यूट ऑफ़ प्रोफ़ेशनल स्टडीज़ से मास कम्युनिकेशन के अंतिम वर्ष  में लक्षिका पढ़ाई कर रही हैं। वह स्थानीय चैनल में एंकर और रेडियो जॉकी के तौर पर भी काम कर चुकीं हैं। इस बार चुनाव में गांव की सीट अनुसूचित जाती की महिला के लिए आरक्षित होने के कारण लक्षिका और परिवार की उसके चुनाव लड़ने पर आम राय बनी। लक्षिका के मुताबिक परिवार ने सोचा कि इस चुनाव में घर की महिलाओं को आगे आना चाहिए। ताकि गांव की समस्याओं का सही तरह से हल निकाला जा सके। इस सोच में लक्षिका ने पहला लक्ष्य हासिल कर लिया है। अब देखना होंगा की वह आगे गांव के लिए कितना बेहतर कर पाती है। गांव के लोग भी एक पढ़ी लिखी महिला उम्मीदवार से चुनाव जीतने के खुश है। लक्षिका ने अपने समक्ष मैदान में उतरी 6 महिला उम्मीदवारो को हराकर सरपंच का पद हासिल किया है। वह गांव में ई-गवर्नेंस सिस्टम लाने की बात करती हैं, जिसमें हर योजना की मॉनिटरिंग वो ख़ुद करेंगी ताकि लोगों के काम एक निश्चत समय में पूरे हो सकें। साथ ही सरकारी सुविधायें लोगो तक आसानी से पहुँच सके।