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दिल्ली : इंडोनेशिया में पाम ऑयल के निर्यात पर प्रतिबंध लगने से भारत में कैसे बढ़ेगी महंगाई!

इंडोनेशिया में पाम ऑयल के निर्यात पर प्रतिबंध लगने से भारत में कैसे बढ़ेगी महंगाई!

दिल्ली: 

बीते 28  अप्रैल से इंडोनेशिया ने पाम तेल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। भारत, दुनिया में खाद्य तेल का सबसे बड़ा उपभोक्ता है इसलिए भारत के लिए मुश्किल भी बड़ी है। भारत में पाल ऑयल का 2. 5 टन खपत की अपेक्षा करीब आधा उत्पादन ही होता है। महज 1.11 टन घरेलू उत्पादन होता है। मांग और आपूर्ति का अंतर करीब 56 फ़ीसदी का है। भारत खाने के तेल में सबसे ज्यादा पाम तेल ही बाहर से मंगवाता है। 

पाल ऑयल को अदृश्य तेल क्यों कहते हैं
भारतीय रसोई में खाना बनाने के लिए पाम तेल का इस्तेमाल सीधे तौर पर भले न होता हो लेकिन , यह हर जगह मौजूद है। इंडियन एक्सप्रेस के रूरल अफेयर्स और एग्रीकल्चर एडिटर हरीश दामोदरन पाम तेल को 'अदृश्य' तेल कहते हैं कि यह किचन में नज़र नहीं आता लेकिन इसका इस्तेमाल व्यापक तौर पर होता है। वे बताते हैं कि पाम तेल का इस्तेमाल राइस ब्रान, सोयाबीन और मूंगफली जैसे तेल में मिलावट के लिए होता है।

इन चीजों को बनाने में होता है इस्तेमाल
एफएमसीजी जैसे नूडल्स , साबुन ,ब्रेड और नमकीन जैसे उत्पाद बनाने में भी पाम तेल का खूब इस्तेमाल होता है।  भारत अपने जरूरत के पाम तेल का 50 फीसदी हिस्सा इंडोनेशिया से आयात करता है। ऐसे  में भारत के लिए इंडोनेशया द्वारा तेल के निर्यात पर रोक लगाए जाने से ख़ासा फर्क पड़ता है। 

सरसों तेल का होता है इस्तेमाल
भारत में खाना बनाने के लिए सरसों  तेल का खूब इस्तेमाल होता है लेकिन, पूरे खाद्य तेल की जरूरत को केवल सरसों के उत्पादन से पूरा नहीं किया जा सकता  है। इसका कारण  है, सरसों  का अधिकतम उत्पादन 2 टन प्रति हेक्टेयर ही किया किया जा सकता हैं। 2 टन में तेल अगर 40 फीसदी भी निकाला जाता है तो  800 किलो वही पाम तेल इसका 4 गुना प्राप्त होगा।


पाम तेल से सस्ता दुनिया में कोई और दूसरा खाद्य तेल नहीं है। यही कारण है कि  भारत या अन्य देश जो खाद्य तेल के बड़े उपभोक्ता है वे पाम तेल पर इतने ज्यादा निर्भर हैं ।