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हाल-ए-बेरोजगारी : नौकरी नहीं मिली तो जूते सिलने लगा सिविल इंजीनियर

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डेस्क: 

देश में बेरोजगारी का आलम क्या है? ये बताने या समझाने की जरूरत नहीं है। मौजूदा समय में सेना भर्ती को लेकर अग्निपथ स्कीम के विरोध में बेरोजगार युवकों का प्रदर्शन जारी है। इस बीच तमिलनाडु से ऐसी खबर आई है जिसने सोचने पर मजबूर किया है कि प्रोफेशनल डिग्री पाए लोगों के लिए भी रोजगार हासिल करना किसी टेढ़ी खीर से ज्यादा नहीं है।

 तमिलनाडु के शिवगंगा जिले का मामला
मामला तमिलनाडु के शिवगंगा जिले का है। शिवगंगा जिले में रहने वाले कार्तिक ए के पास सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री है लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से वे जूते सिलने का काम करते हैं। कार्तिक ए ने बताया कि ये उनका पैतृक व्यवसाय है। उनके पिता ने यही काम करते हुए उनको पढ़ाया लिखाया। आज मजबूरन उनको भी यही काम करने के लिए विवश होना पड़ा है।

 

सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई बेकार गई
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में अपना दर्द साझा करते हुए कार्तिक ए ने बताया कि मैं एक सिविल इंजीनियर हूं। काफी पैसा खर्च करके मैंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। जब नौकरी की तलाश में निकला तो मुझे महज 4 से 5 हजार रुपये की नौकरी मिली। 5 हजार रुपये की नौकरी से परिवार नहीं चलाया जा सकता। वो काफी नहीं है। मजबूरन मैं जूते सिल रहा हूं। 

बेरोजगारी दर में काफी इजाफा हुआ है
गौरतलब है कि सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी की रिपोर्ट बताती है कि देश में बीते कुछ वर्षों में बेरोजगारी दर में भारी इजाफा हुआ है। पिछले वर्ष के मुकाबले बेरोजगारी दर दोगुनी हो गई है। तकरीबन 45 लाख वैसे हैं जिन्होंने निराश होकर नौकरी की तलाश ही छोड़ दी है। निजी कंपनियों में भी भारी संख्या में छंटनी की गई। सरकारी वेकैंसी नहीं आ रही।