द फॉलोअप, रांची
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने MMDR अधिनियम पर कांग्रेस के आरोप पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मामले पर सिर्फ भ्रम फैला रहा है। उन्होंने कहा कि MMDR अधिनियम में राज्यों का राजस्व और अधिकार पूरी तरह सुरक्षित हैं। इस बिल से राज्यों की रॉयल्टी, प्रीमियम, DMF और GST का एक-एक पैसा सुरक्षित रहेगा और अवैध खनन पर भी लगाम लगेगी। MMDR अधिनियम का उद्देश्य खनिज क्षेत्र में स्थिरता, पारदर्शिता और विकास को गति देते हुए राज्यों के राजस्व हितों को सुरक्षित करना है। श्री साहू ने कहा कि MMDR अधिनियम पर कांग्रेस और झामुमो में प्रतिस्पर्धा चल रही है। दोनों अलग-अलग आंदोलन की घोषणा कर रहे हैं। कांग्रेस का MMDR पर आंदोलन जनता को गुमराह करने की कोशिश है। यह केवल भ्रम फैलाने की राजनीति है। हर अच्छे काम का विरोध करना कांग्रेस और विपक्षियों का काम है। इन्होंने कभी किसी अच्छे काम की सराहना की हो तो बताइए। जनता इन दलों से अब तथ्य और विकास का हिसाब मांगेगी।

सरकार के संरक्षण में जारी कोयले की चोरी पर लगेगी लगाम
श्री साहू ने कहा कि 2019 से लेकर अब तक बड़े पैमाने पर कोयले की चोरी राज्य सरकार के संरक्षण में और पुलिस अधिकारियों के सहयोग से कराया गया है। कई कोयला कम्पनियां बंद होने के कगार पर है। झारखंड में बेतहाशा सेस में जो वृद्धि हुई है, वह कोयला उद्योग के लिए अभिशाप बन चुका है। दूसरे राज्यों जैसे ओड़िसा, छत्तीसगढ़ अन्य राज्यों की तुलना करने पर खुद व खुद समझ में आ जाएगा कि झारखंड सरकार, कांग्रेस और झामुमो इसका विरोध क्यों कर रही है। केरल और कर्नाटक, कांग्रेस शासित प्रदेश ही हैं, वहां या पूरे देश में कहीं इसको लेकर कोई विरोध नहीं है लेकिन झारखंड में विरोध किया जा रहा है। क्योंकि इन दलों को कोयले की चोरी से जो काली कमाई हो रही थी केंद्र सरकार ने उस पर तगड़ा प्रहार करते हुए इनकी भ्रष्टाचार की गंगोत्री को ही बंद करने का काम किया है, असली छटपटाहट इसी बात की है। इसलिए ये लोग इस बिल से बिलबिला रहे हैं।
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सेस अधिक होने के कारण झारखंड के उद्यमी बाहर से कोयला खरीद रहे
श्री साहू ने कहा कि पूर्ण विश्वास है कि नरेंद्र मोदी कोई ऐसा काम नहीं करेंगे जिससे देश और देशवासियों के लिए अहितकर हो, हां कांग्रेस और झामुमो के कुछ मठाधीशों के लिए यह कानून जरूर अहितकर होगा। इस प्रकार के कानून से जनता का तो भला होगा लेकिन चंद लोगों को हानि होगी, इसीलिए यह लोग परेशानी में हैं। श्री साहू ने कहा कि आज कोयले की चोरी के चलते बीसीसीएल बंदी के कगार पर है। सरकार की उत्पादित कोयले नहीं खरीदे जा रहे हैं। चोरी का कोयला चूंकि कम कीमत पर उपलब्ध है, उसे खरीदने का काम किया जा रहा है। जिससे कोयला कंपनियों को घाटा हो रहा है। सेस अधिक होने के कारण यहां के कोयले को यहीं के उद्यमी नहीं खरीद रहे हैं, पड़ोसी राज्यों से कोयला मंगाकर अपने-अपने उद्योग धंधा को चलाने का काम उनके द्वारा किया जा रहा है।
श्री साहू ने कहा कि धनबाद, चतरा, हजारीबाग सहित पूरे राज्य के विभिन्न हिस्सों में कोयला का अवैध कारोबार चरम पर है। दोनों हाथ से कांग्रेस और झामुमो लूट रही है। सीआईएसएफ की तैनाती से कोयला चोरी पर लगाम लगा है। इन दलों के द्वारा फैक्ट्री पर दबाव बनाकर उन्हें अवैध कोयला खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है। इन दलों को सरकारी राजस्व की बजाय अपनी निजी राजस्व की चिंता अधिक है। श्री साहू ने कहा कि छात्र आंदोलन मामले में कांग्रेस, झामुमो की साजिश सामने आ गई है। शुरू से हमारी पार्टी ने सीबीआई जांच की मांग की है। कांग्रेस ने हेमंत सरकार पर दबाव बनाने का भी काम नहीं किया। छात्र आंदोलन जैसे गंभीर विषय पर कांग्रेस ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। इस पर विरोध एवं आंदोलन करने का काम नहीं किया, जो कि छात्रों और राज्य के भविष्य से जुड़ा हुआ विषय था। छात्रों को धोखा देकर कांग्रेस और झामुमो ने आंदोलन को समाप्त करवाने का काम किया। बच्चे फिर से आंदोलन करने की बात कर रहे हैं। सीबीआई जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील किया गया है, इसे स्वीकृत किए जाने की भी सूचना है। श्री साहू ने कहा कि जिस प्रकार झामुमो और कांग्रेस ने नौकरियों को बेचकर भारी अपराध किया है, महापाप का घड़ा तो फूटेगा ही।

छत्तीसगढ़ में लौह अयस्क पर 22.5 रुपए प्रति टन सेस, झारखंड में 600 रुपए
श्री साहू ने कहा कि 2014 के बाद राज्यों के खनन राजस्व में 354% की वृद्धि हुई। खनिज राजस्व का लगभग 90% राज्यों को प्राप्त होता है। राज्य सरकार ने लौह अयस्क पर ₹600 प्रति टन उपकर लगाया, जबकि छत्तीसगढ़ में यह महज ₹22.50 है। वहीं कोयले पर सेस ₹100 से बढ़ाकर ₹450 प्रति टन कर दिया गया। जब देशभर में राज्यों का खनिज राजस्व बढ़ रहा है, तब झारखंड में भारी उपकर लगाकर उद्योग, रोजगार और निवेश को नुकसान क्यों? वहीं श्री साहू ने कहा कि झारखंड सरकार को बेवजह दोषारोपण करने की बीमारी है। केंद्र पर ₹1.36 लाख करोड़ का बकाया की रट लगाने वाली झारखंड सरकार उसका पूरा मदवार हिसाब और कानूनी आधार रखे। हर नाकामी का ठीकरा केंद्र पर और अपनी जिम्मेदारी जहां, वहां पर चुप्पी। कांग्रेस और झामुमो की यह दोहरी राजनीति अब नहीं चलने वाली है।
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