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भारत के लोग जल्द ही बुलेट ट्रेन की सवारी कर सकेंगे। देश की पटरियों पर जल्द बुलेट ट्रेन दौड़ेगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि 2026 तक बुलेट ट्रेन शुरू होने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी बताया कि 2026 तक सूरत से बिलिमोरा के बीच पहली बुलेट ट्रेन चलाने का टार्गेट रखा गया है। उन्होंने कहा कि काम बहुत अच्छा चल रहा है और उम्मीद है कि साल 2026 तक सेवा शुरू हो जाएगी।

साल 2015 में बुलेट ट्रेन शुरू करने की हुई थी घोषणा
बता दें कि साल 2015 में मुंबई से अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन शुरू करने की घोषणा की गई। बुलेट ट्रेन के लिए भारत ने जापान के साथ समझौता किया। सितंबर 2017 में इस प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया गया। उस वक्त रेलवे ने कहा था कि 15 अगस्त 2022 को हाई स्पीड ट्रेन मुंबई से अहमदाबाद के चलेगी। साल 2022 की इस गाइडलाइन को एक साल बढ़ाकर 2023 कर दिया।
भारत की पहली बुलेट ट्रेन अहमदाबाद से मुंबई के बीच चलेगी
भारत की पहली बुलेट ट्रेन के लिए जापान मदद कर रहा है। इसके लिए भारत और जापान के बीच समझौता हुआ है। इस पूरे प्रोजेक्ट पर 1.08 लाख करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जिसमें से 88 हजार करोड़ रुपये यानी 81% का कर्ज जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) से मिला है। भारत की पहली बुलेट ट्रेन अहमदाबाद से मुंबई के बीच चलेगी। इसके लिए 508.09 किलोमीटर लंबा हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनाया जा रहा है। 463 किमी का कॉरिडोर जमीन के उपर होगा और 26 किलोमीटर का कॉरिडोर टनल में बनाया जाएगा।

इसमें 12 स्टेशन होंगे
ये बुलेट ट्रेन गुजरात, महाराष्ट्र और दादरा नगर हवेली से गुजरेगी। इसमें 12 स्टेशन होंगे। इनमें से 8 स्टेशन गुजरात और 4 महाराष्ट्र में बनाए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट की पूरी जिम्मेदारी नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन (NHSRCL) की है। NHSRCL का अनुमान है कि ट्रेन सर्विस शुरू होने के बाद हर दिन 17,900 यात्री इससे सफर करेंगे. हर आधे घंटे के अंतर पर रोजाना 35 फेरे लगाए जाएंगे। सुबह 6 बजे से रात 12 बजे तक यह ट्रेन चलेगी।

बुलेट ट्रेन से फायदा क्या होगा?
समय बचेगाः NHSRCL ने अपनी रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि पूरी तरह से बुलेट ट्रेन शुरू होने का बाद हर दिन 17,900 यात्री इससे सफर करेंगे। वहीं, 2053 तक हर दिन 92,900 यात्री बुलेट ट्रेन से सफर कर सकते हैं। अभी अहमदाबाद से मुंबई जाने में 6 घंटे का समय लगता है, लेकिन बुलेट ट्रेन ने 2.07 घंटे में ये सफर पूरा हो जाएगा।
अर्थव्यवस्था में तेजी आएगीः लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और यूनिवर्सिटी ऑफ हैम्बर्ग की एक स्टडी बताती है कि जिन देशों में हाई स्पीड रेल सिस्टम है, वहां की जीडीपी में 2.7% तक का इजाफा हुआ है. इसके अलावा इस प्रोजेक्ट से 90 हजार नौकरियां भी पैदा होने की उम्मीद है. इस प्रोजेक्ट में 75 लाख टन सीमेंट और 21 लाख टन स्टील का इस्तेमाल होगा, जो भारत में ही बनेगा।
पर्यावरण भी सुधरेगाः हाई स्पीड रेल से कार्बन का उत्सर्जन भी कम होता है. UIC की रिपोर्ट के मुताबिक, 600 किमी की यात्रा में बुलेट ट्रेन से 8.1 किलो कार्बन का उत्सर्जन होता है. जबकि, इतनी ही दूरी की हवाई यात्रा पर 93 किलो और कार से सफर में 67.4 किलो कार्बन निकलता है।