डेस्क :
भारत की सबसे बड़ी दुग्ध उत्पादक सहकारिता कंपनी अमूल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय को एक पत्र लिखा है। लिखे पत्र में प्लास्टिक स्ट्रॉ बैन करने से पहले थोड़ा और समय देने की अपील की है। पत्र में कहा गया है कि इस पर प्रतिबंध लगाने से पेय पदार्थ और भी महंगे हो सकते हैं।अमूल ने कहा कि इस कदम से दुनिया के सबसे बड़े कमोडिटी उत्पादक, किसानों और दूध की खपत पर "नकारात्मक प्रभाव" पड़ेगा।अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की खबर के मुताबिक अमूल ने 28 मई को पीएमओ को लिखे पत्र में कहा है कि आगामी 1 जुलाई से जूस और डेयरी उत्पादों के जिन प्लास्टिक के स्ट्रॉ पर प्रतिबंध लगाने की सरकार तैयारी कर रही है, इसका उद्योग 790 मिलियन (79 करोड़) का है। अमूल हर साल अरबों छोटे डेयरी कार्टन बेचता है, जिसमें प्लास्टिक के स्ट्रॉ लगे होते हैं। खबर के अनुसार सरकार के इस फैसले ने अमूल, पेप्सिको इंक और कोका-कोला सहित वैश्विक पेय प्रमुखों को हिलाकर रख दिया है। वही दूसरी ओर सरकार ने अपना रुख बदलने से इनकार कर दिया और कंपनियों को वैकल्पिक स्ट्रॉ के उपयोग को बढ़ावा देने को कहा है।

स्ट्रॉ करता है दूध की खपत में मदद
अमूल डेयरी समूह के प्रबंध निदेशक आरएस सोढ़ी ने कहा कि प्लास्टिक स्ट्रॉ दूध की खपत को बढ़ावा देने में मदद करते हैं। सोढ़ी ने लिखा है कि प्रतिबंध में देरी से 10 करोड़ डेयरी किसानों को राहत और लाभ मिलेगा।सोढ़ी ने अपने पत्र में कहा कि एक जुलाई से प्रतिबंध लागू होने के बाद अमूल को बिना स्ट्रॉ के पैक बेचने पड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश में कम कीमत 5 रुपये से 30 रुपये कीमत वाले जूस और दूध उत्पाद व पेय पदार्थ काफी लोकप्रिय हैं। अगर प्लास्टिक स्ट्रॉ पर बैन लगा तो ये पेय पदार्थ पेपर स्ट्रा यूज करने की वजह से और भी महंगे हो सकते हैं। आपको बता कि अमूल आठ अरब डॉलर के व्यापार का हिस्सा है।

वैकल्पिक स्ट्रॉ की राह नहीं आसान !
जानकारी के मुताबिक़ पारले ने भारत सरकार को एक पत्र भी लिखा है, जिसमें कहा गया है कि वैकल्पिक स्ट्रॉ का पर्याप्त स्थानीय उत्पादन नहीं है और आयातित कागज और बायोडिग्रेडेबल वेरिएंट लगभग 250% अधिक महंगे हैं। पेय पदार्थ की एक और बड़ी कंपनी पारले एग्रो की मुख्य कार्यकारी शौना चौहान ने कहा कि कंपनी ने अभी के लिए पेपर स्ट्रॉ का आयात करना शुरू कर दिया है, उन्होंने कहा कि पेपर स्ट्रॉ महगें होने साथ कम टिकाऊ हैं।
