डेस्क:
कोरोना अभी पूरी तरह से थमा नहीं है कि एक और संक्रामक बीमारी ने पैर फैलाना शुरू कर दिया है। गौरतलब है कि दुनियाभर में मंकीपॉक्स (Monkeypox) का खतरा बढ़ता जा रहा है। भारत (India) में मंकीपॉक्स के 4 मरीजों की पुष्टि हो चुकी है। 3 केरल के हैं और 1 दिल्ली का। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मंकीपॉक्स को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है। डब्ल्यूएचओ लगातार विश्व के सभी देशों को ये निर्देश दे रहा है कि मंकीपॉक्स की रोकथाम के लिए तमाम जरूरी कदम उठायें। अब तेलागंना (Telangana) में भी मंकीपॉक्स का संदिग्ध मरीज मिलने की खबर है। गौरतलब है कि दिल्ली में मिले मरीज के शरीर में घाव हो गये थे।
उसकी हालत फिलहाल स्थिर है। दिल्ली के लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल (LNJP) में उसका इलाज किया जा रहा है। दिलचस्प है कि इस व्यक्ति ने हाल-फिलहाल विदेश की यात्रा नहीं की लेकिन हाल ही में परिवार के साथ हिमाचल प्रदेश गया था।

तेलांगना के कामारेड्डी जिले में मिला संदिग्ध
तेलांगना के कामारेड्डी (Kamareddy) जिले में भी मंकीपॉक्स का संदिग्ध 1 मरीज मिला है। 40 वर्षीय ये आदमी हाल ही में कुवैत से लौटा है। 6 जुलाई को आदमी कुवैत से लौटा और 20 जुलाई को उसे बुखार हुआ। उसके शरीर में चकत्ते भी उभर आये थे। उसे कामारेड्डी के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मरीज का सैंपल लेने के बाद उसे एनआईवी पुणे भेजा जायेगा। मरीज को आइसोलेट किया गया है। गौरतलब है कि मंकीपॉक्स के मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए लोग घबराये हुए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय (Union Health Ministry) ने भी एडवाइजरी जारी की है। ऐसे में जानने वाली बात ये है कि मंकीपॉक्स संक्रमण का लक्षण क्या है। ये कैसे फैलता है।

मंकीपॉक्स वायरस संक्रमण के लक्षण क्या हैं!
मंकीपॉक्स संक्रमित व्यक्ति को तेज बुखार आता है। शरीर में लाल चकत्ते दिखते हैं। काफी सुस्ती रहती है। सिरदर्द होता है। लिम्फ नोड्स में सूजन रहती है। गले में खराश रहता है। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि मंकीपॉक्स, चेचक जैसा है लेकिन चेचक जितना संक्रामक नहीं है। इससे मौत की संभावना काफी कम होती है। वायरस के संक्रमण से लक्षणों की शुरुआत की अवधि तक 6 से 13 दिनों का वक्त होता है। मंकीपॉक्स संक्रमण के लक्षण 2 से 4 हफ्ते तक रह सकते है। त्वचा फटती है और ऐसा बुखार आने के 1 या 3 दिन बात होता है। 75 फीसदी मामलों में संक्रमण हाथ की उगलियों और पैर के तलवों को प्रभावित करता है।

मंकीपॉक्स का वायरस लोगों में कैसे फैलता है!
मंकीपॉक्स वायरस संक्रमित व्यक्ति या जानवर के संपर्क में आने से फैलता है। दूषित सामग्री से भी वायरस फैलता है। संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकले तरल पदार्थ जैसे की मवाद, सांस की बूंदों से ये वायरस फैलता है। संक्रमित व्यक्ति के बिस्तर के निकट संपर्क में आने या यौन संबंध स्थापित करने ही हालत में भी मंकीपॉक्स का वायरस फैल सकता है। गिलहरी और बंदरों में मुख्य रूप से इस वायरस का संक्रमण मिला है। अध्ययन से पता चला है कि 95 फीसदी मामलों में यौन संबंध के दौरान ये वायरस एक इंसान से दूसरे इंसान में फैला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 27 अप्रैल से 24 जून 2022 के बीच क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने 16 देशों के 528 संक्रमितों का अध्ययन किया। 98 फीसदी संक्रमित मरीज समलैंगिक या बाईसेक्सुअल पुरुष थे।

मंकीपॉक्स बीमारी से बचाव का उपाय क्या-क्या है!
सवाल है कि इससे बचने का उपाय क्या है। आधा पका हुआ या कच्चा मांस ना खायें। मंकीपॉक्स वायरस से संक्रमित लोगों से उचित दूरी बनाये रखें। संक्रमित व्यक्ति के बिस्तर, कपड़े और निजी सामान का इस्तेमाल ना करें। मंकीपॉक्स से संक्रमित जानवरों के निकट ना जायें। मंकीपॉक्स से बचने के लिए सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन का पालन करें। मंकीपॉक्स का लक्षण दिखे तो पैनिक करने की बजाय डॉक्टर से संपर्क करें। मध्य और पश्चिम अफ्रीका से लौटे लोगों के संपर्क में आने से बचें। विदेश यात्रा करने से बचें। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। सेनिटाइजर का इस्तेमाल करें।

साल 1958 में पहली बार चला था मंकीपॉक्स का पता
मंकीपॉक्स बीमारी साल 1958 में सबसे पहले सामने आई थी। रिसर्च के लिए रखे गये बंदरों में ये संक्रमण मिला था, इसलिए इसे मंकीपॉक्स कहा गया। अभी तक 75 देशों में मंकीपॉक्स के 16 हजार से ज्यादा मामले सामने आये हैं। 1 महीने पहले 47 देशों में महज 3 हजार 40 मरीज ही थे। मंकीपॉक्स का तेजी से बढ़ता दायरा स्वास्थ्य विशेषज्ञों को चिंता में डाल रहा है।