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Ranchi : राजधानी रांची के इस स्कूल में शुक्रवार को दी जा रही थी छुट्टी, DEO ने दिया ये निर्देश

राजधानी रांची के इस स्कूल में शुक्रवार को दी जा रही थी छुट्टी, DEO ने दिया ये निर्देश

डेस्क: 

झारखंड (Jharkhand) के सरकारी स्कूलों में रविवार की जगह शुक्रवार को छुट्टी दिए जाने का मामला सुर्खियों में है। ताजा मामला सामने आया है राजधानी रांची (Ranchi) से। मिली जानकारी के मुताबिक राजधानी रांची के चंदवे स्थित राजकीय मध्य विद्यालय (Government Middle School Chandwe) में भी शुक्रवार को छुट्टी दी जा रही थी। स्कूल उर्दू विद्यालय के रूप में चिह्नित नहीं है। जिला शिक्षा पदाधिकारी (District Education Officer) का कहना है कि स्कूल में रविवार को ही साप्ताहिक अवकाश का प्रावधान है। यहां मनमाने तरीके से शुक्रवार को छुट्टी दी जा रही थी। 

मनमाने तरीके से शुक्रवार को छुट्टी घोषित
मिली जानकारी के मुताबिक चंदवे स्थित राजकीय मध्य विद्यालय में मनमाने तरीके से पहले तो शुक्रवार को छुट्टी घोषित की गई और स्कूल में उर्दू लिख दिया गया। मामले में प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी से प्रतिवेदन मांगा गया है। दरअसल, कांके के प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी ने बीते 14 जुलाई को अपनी रिपोर्ट में बताया था कि राजकीय मध्य विद्यालय (चंदवे) में बीते कई वर्षों से शुक्रवार को ही अवकाश दिया जा रहा था। अब जिले के डीईओ ने कहा कि रविवार को ही छुट्टी होगी। 

झारखंड के कई जिलों में मनमाना नियम
गौरतलब है कि झारखंड की राजधानी रांची, जामताड़ा, कोडरमा, साहिबगंज, गिरिडीह, पलामू, लातेहार और दुमका सहित कई जिलों में कई स्कूलों में रविवार की जगह शुक्रवार को छुट्टी दी जा रही थी। जहां मुस्लिम आबादी ज्यादा है वहां स्कूलों में उर्दू लिख दिया गया जबकि उपरोक्त स्कूल उर्दू स्कूल के रूप में चिह्नित भी नहीं है। मामले की जानकारी मिलने के बाद शिक्षा मंत्री जगरन्नाथ महतो (Education Minister Jagannath Mahato) ने उक्त जिलों के अधिकारियों को जांच का निर्देश दिया और रिपोर्ट मांगा। फटकार भी लगाई। 

समुदाय विशेष ने आबादी होने का तर्क दिया
कुछ दिन पहले दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में बताया गया था कि गढ़वा, जामताड़ा, पलामू और लातेहार के 152 स्कूलों में रविवार की बजाय शुक्रवार को छुट्टी दी जा रही थी। प्रार्थना के बोल बदल दिए गये थे। बच्चे यहां हाथ जोड़कर प्रार्थना नहीं कर रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक यहां रहने वाले समुदाय विशेष का कहना था कि चूंकि यहां हमारी आबादी तकरीबन 75 फीसदी है इसलिए हमारे नियम लागू होंगे।