नंदलाल तुरी/पाकुड़:
पाकुड़ सदर प्रखंड से जुड़े सीनाजोरी पंचायत का पतरापाड़ा गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। गांव में आजादी के 7 दशक बाद भी पक्का आवास, वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन, बिजली, शुद्ध पेयजल और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। ग्रामीणों को सरकार द्वारा संचालित पीएम आवास या आबुआ आवास योजना का लाभ नहीं मिला है। गांव में अधिकतर दलित समाज के लोग रहते हैं। पतरापाड़ा गांव में करीब 150 परिवार रहते हैं। वर्षों पहले केवल 10 परिवारों को ही सरकारी पक्का मकान मिला था। ग्रामीणों की शिकायत है कि जो पक्के मकान मिले थे, वह भी आधा-अधूरा ही बना है।

बारिश के मौसम में होती है परेशानी
ग्रामीण कहते हैं कि बिचौलिया द्वारा खपरैल वाले मकान पर किसी प्रकार छत को ढलाई कर दी गई है। कुछ-कुछ घरों तो छत के बदले एडबेस्टस लगा दी गई है। बारिश में छत टपकने लगती है। लोगों को काफी तकलीफों का सामना करना पड़ता है। घर के अंदर पानी घुसने के कारण सो नहीं पाते हैं। ग्रामीणों ने शिकायत की है कि बारिश के मौसम में पूरे परिवार को रतजगा करना पड़ता है। कच्ची मिट्टी के मकान के ढह जाने की आशंका सताती है। वहीं, सांप-बिच्छू जैसे सरीसृपों का डर भी ग्रामीणों को सताता है।

दिहाड़ी मजदूरी से चलती है आजीविका
गांव में अधिकांश लोग दिहाड़ी मजदूरी करके परिवार की आजीविका चलाते हैं। कई लोग रोजगार की तलाश में पलायन भी कर चुके हैं। इतनी कमाई नहीं होती है कि उस पैसे से खुद पक्का मकान बना सकें। गांव में अधिकांश मकान कच्ची मिट्टी और खपरैल से बने हैं। ग्रामीणों ने आगे बताया कि प्रखंड कार्यालय तथा जनप्रतिनिधि से केवल आश्वासन ही मिलता है। उनकी शिकायत पर सुनवाई नहीं होती।