द फॉलोअप डेस्क
बात थोड़ी पुरानी है। अविनाश कुमार सिंह झारखंड प्रशासनिक सेवा के चर्चित अधिकारी रहे हैं। वह राज्य सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। पद पर रहते कई बार वह चर्चा में भी आए। इन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा में प्रोन्नति भी मिली। उसके बाद वित्त विभाग में कई वर्षों तक काम किया। रिटायरमेंट के बाद भी 3 वर्षों तक उन्हें संविदा पर काम करने का मौका मिला। अविनाश जी ने सचिवालय को लेकर एक कहानी सुनाई थी। आज भी वह कहानी पूरी तरह प्रासंगिक है। उन्होंने बताया था कि पटना में रहकर वह बीपीएससी की तैयारी कर रहे थे। गिरिडीह के रहने वाले अविनाश जी के पिता इसी जिले में हाई स्कूल शिक्षक थे। इस कारण कभी-कभी उनके पिताजी को सचिवालय से जुड़े काम आ पड़ते थे। पटना में रहने के कारण पिताजी के काम को कराने के लिए उन्हें खुद पटना सचिवालय जाना पड़ जाता था। सचिवालय में किसी काम को कराने के लिए अगर कोई परिचित मिल जाए तो मुश्किलें आधी हो जाती है। इस कारण वह तत्कालीन उच्च शिक्षा निदेशक डी पांडे के पास चला जाया करते थे।
पांडे जी गिरिडीह के ही रहने वाले थे। इस कारण उन्हें थोड़ी मदद मिल जाती थी। अविनाश जी ने बताया कि एक दिन पटना सचिवालय से निकलते निकलते उन्हें शाम हो गई। साथ में डी पांडे भी थे। जब वह सचिवालय से बाहर निकल रहे थे तो देखा कि एक व्यक्ति बार-बार झुक झुक कर सचिवालय भवन को प्रणाम कर रहा है। साथ में डी पांडे को यह देखकर बहुत आश्चर्य हुआ। क्योंकि भगवान सूर्य सचिवालय भवन सूरज के विपरीत दिशा में थे। पांडे जी को नहीं रहा गया। वह उस व्यक्ति से बार-बार झुक झुक कर प्रणाम करने का कारण पूछ डाला। इस पर उसे व्यक्ति ने उल्टा सवाल कर डाला। पूछा, क्या आप भी यही काम करते हैं। पांडे जी ने जैसे ही हां में सिर हिलाया, इसके बाद वह व्यक्ति झुक झुक कर पांडे जी को ही नमस्कार करने लगा। ऐसा देख पांडे जी और वह खुद भी आश्चर्य में पड़ गए। फिर पूछा कि आप ऐसा क्यों कर रहे हैं। उस व्यक्ति ने सरलता से जवाब दिया। बाबू 6 महीना से एक काम को लेकर इस बिल्डिंग का चक्कर लगा रहे थे। बहुत परेशान थे। आज वह काम हो गया। भगवान ना करें कि फिर कभी यहां आना पड़े। इसीलिए इस बिल्डिंग को बार-बार प्रणाम कर रहे है। बात भले पुरानी है, पटना हो या रांची हो,आज भी वही कहानी है।
