रामगढ़
रामगढ़ जिले के कुजू ओपी क्षेत्र स्थित करमा परियोजना में शनिवार सुबह अवैध खनन के दौरान चाल धंसने से चार मजदूरों की मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे के बाद इलाके में भारी हंगामा शुरू हो गया। मृतकों के परिजनों और ग्रामीणों ने मुआवजे की मांग को लेकर खदान परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। शवों को परियोजना पदाधिकारी कार्यालय के सामने रखकर परिजन और ग्रामीण पूरी रात डटे रहे।
आखिरकार शनिवार देर रात दो बजे के बाद सीसीएल प्रबंधन, जिला प्रशासन और राजनीतिक दलों के बीच त्रिपक्षीय वार्ता हुई। लंबी बातचीत के बाद मुआवजा और नौकरी देने पर सहमति बनी। इसके बाद परिजनों ने आंदोलन समाप्त किया और शवों को वहां से हटाया गया।

8 लाख के मुआवजे और नौकरी पर बनी सहमति
वार्ता के दौरान तय हुआ कि सीसीएल प्रबंधन प्रत्येक मृतक के परिजन को 1.70 लाख रुपये देगा, जबकि जिला प्रशासन की ओर से 30 हज़ार रुपये की राशि दी जाएगी। इस तरह चारों मृतकों के परिजनों को कुल मिलाकर 8 लाख रुपये मुआवजा मिलेगा। इसके अलावा प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को आउटसोर्सिंग के तहत नौकरी भी देने की बात तय हुई है।
मृतकों की पहचान और सहमति पत्र पर हस्ताक्षर
हादसे में जिन चार मजदूरों की मौत हुई, उनकी पहचान मोहम्मद इम्तियाज, रामेश्वर मांझी, वकील करमाली और निर्मल मुंडा के रूप में की गई है। समझौते के तहत मृतकों के परिजनों गुलशन करमाली, बुधन मांझी, मोहम्मद मुमताज और विजय करमाली ने सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए। वहीं सीसीएल की ओर से कार्मिक प्रबंधक अविनाश कुमार श्रीवास्तव, संजय कुमार सिंह और परियोजना पदाधिकारी रामेश्वर मुंडा ने दस्तखत किए।

क्या था पूरा मामला?
करमा परियोजना के महुआतुंगरी इलाके में शनिवार तड़के कुछ ग्रामीण अवैध खनन के लिए सीसीएल के लीज क्षेत्र में घुसे थे। इसी दौरान अचानक जमीन धंस गई और चार लोग कोयले के नीचे दब गए। उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद सीसीएल प्रबंधन पर शव हटाने में जल्दबाज़ी और लापरवाही का आरोप लगा। ग्रामीणों ने नाराज़गी जताई और मुआवजे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जो देर रात तक चला।
