logo

सत्ता और सचिवालय का सच : अब बहुत हो गया...

अब बहुत हो गया...

जीतेंद्र कुमारः
चौबे जी का ग्रह नक्षत्र ठीक ही नहीं हो रहा। पहले कई तरह के मामलों में फंसे। शराब घोटाले में उलझे तो हजारीबाग के जमीन विवाद में भी बुरी तरह फंसे। लोअर कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली। जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। वहां भी उन पर हाईकोर्ट ने रहम नहीं की। बेचारे सुप्रीम कोर्ट गए। अंततः देश के सर्वोच्च अदालत से 31 जुलाई को चौबे जी को राहत मिल गयी। बेल हो गया। जेल से बाहर आ गए। सरकार में ज्वाइनिंग दे दी। ज्वाइनिंग के बाद उनकी पोस्टिंग की फाइल भी बढ़ी। लेकिन तीन महीने बाद भी चौबे जी प्रतीक्षारत हैं। कभी पूरे राज्य पर जिसका हांक-डांक चलता था, दूसरे की पोस्टिंग और ट्रांसफर चौबे जी के एक मात्र इशारे पर होता था, आज वे खुद के लिए अर्जुदा हैं।


उनके सहकर्मी बताते हैं। अब बहुत हो गया। अब बेचारे को पोस्टिंग मिल जानी चाहिए। उनके कैडर के भी तो कई अधिकारी जेल गए थे। फिर बेल पर जेल से बाहर भी निकले। जेल से निकलने के कुछ अंतराल के बाद उनको पोस्टिंग दे दी गयी। आज उनमें कोई सचिव है तो कोई स्वास्थ्य विभाग को ठीक कर रहे हैं। फिर चौबे जी के साथ ऐसा वर्ताव क्यों। उन्होंने गलती की थी तो उसकी सजा भी मिली है। गलती बड़ी होगी तो कोर्ट से फिर सजा मिलेगी। लेकिन कोर्ट ने जब उन्हें फिलहाल थोड़ी राहत दी है तो सरकार को भी उनके प्रति सहृदयता दिखानी चाहिए।

Tags - Power and the Secretariat Jharkhand Unnamed Truth Inside Power Behind the Scenes