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हाल~ए~राज्यसभा  : दुनियां का 8वां अजूबा बनी झारखंड भाजपा, रेडिशन ब्लू में विधायकों को रखने पर घिरी पार्टी; क्या सता रहा है हॉर्स ट्रेडिंग का डर!

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सूरज ठाकुर/रांची:

दुनिया में सात अजूबे खोजे जा चुके हैं। 8वें की तलाश रांची में पूरी हुई है। 18 जून को झारखंड की 2 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाली वोटिंग से पहले भारतीय जनता पार्टी अपने विधायकों को पांच सितारा होटल रेडिशन ब्लू में ले आई है। सारे विधायक अगले 2 दिन यहीं रहेंगे। भाजपा के इस कदम से झारखंड ही नहीं, बल्कि देशभर की सियासत चौंक गई है। चौंकना लाजिमी है। अब तक सियासी पिच पर इस खेल में आक्रामक बैटिंग करने वाली भाजपा अचानक डिफेंसिव मोड में आएगी तो हैरानी होगी ही।

हॉर्स ट्रेडिंग के आरोपों पर महागठबंधन के विधायकों को हॉर्स बताकर उन्हें कसकर बांधने की नसीहत देने वाली भाजपा को अपने हॉर्सेज को फाइव स्टार अस्तबल में बांधना पड़ा है।

एक राज्यसभा सीट के लिए जरूरी संख्याबल जुटाने के लिए सत्ताधारी दल के विधायकों के अंतर्रात्मा के भरोसे बैठी भाजपा को अब अपने ही विधायकों के अंतर्रात्मा का दूसरे के पक्ष में जाग जाने का डर सताने लगा है। यह 8वां अजूबा ही तो है। 

सोमवार को एनडीए विधायक दल की बैठक में 7 विधायक नहीं पहुंचे थे। कहीं भारतीय जनता पार्टी इस बात से तो नहीं घबरा गई है कि वोटिंग के दिन 7 की जगह 17 विधायकों को कोई जरूरी और निजी काम ना आ जाये। वैसे भी महागठबंधन दावा कर रहा है कि उसके पास अब 56 नहीं बल्कि 61 विधायकों का समर्थन है। 

फाइव स्टार होटल से गुजरता है डेमोक्रेसी का रास्ता
न्यू इंडिया में नई डेमोक्रेसी का रास्ता फाइव स्टार होटल से होकर जाता है। राज्यसभा चुनाव में जब हॉर्स ट्रेडिंग की बात आती है तो फिर केवल अस्तबल की सुरक्षा के भरोसे नहीं रहा जा सकता। सियासी अस्तबल कितना भी सुरक्षित हो, यहां हॉर्सेज के बिदकने की हमेशा आशंका बनी रहती है। सियासत में लोकतंत्र हमेशा संविधान नहीं बचाता। राज्यसभा चुनाव, सरकार गठन, पार्टी की टूट और नए समीकरणों की खोज में जब लोकतंत्र डगमगाता है तो इसे रिजार्ट, होटल, गेस्ट हाउस और रेस्ट हाउस ही बचाता है।

झारखंड में अबकी बार डेमोक्रेसी की रक्षा का बीड़ा रेडिशन ब्लू ने उठाया है।

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी कह भी रहे हैं कि इतना बड़ा होटल आखिर बनाया किसलिए है। इन्हीं सब कामों के लिए। झारखंड में राज्यसभा की 2 सीटों के लिए 18 जून को होने वाली वोटिंग से पहले झारखंड भाजपा का लोकतंत्र यहीं इसी रेडिशन ब्लू में ही बचेगा।

दरअसल, ऐसे चुनावों में वोटिंग पार्टी के प्रति वफादारी या विचारधारा से जुड़ाव के आधार पर नहीं होता। सारा मसला ही अंतर्रात्मा के जागने पर टिका है। अब अंतर्रात्मा किसके पक्ष में जागेगी, इसपर तो किसी का वश नहीं। जब पार्टी को लगता है कि विधायकों की अंतर्रात्मा जागने की प्रक्रिया अपनी दिशा भटक सकती है तो उन्हें नियंत्रित रखने के लिए रेडिशन ब्लू जैसा पांच सितारा होटल काम आता है। 

सियासी बाजार में प्रचलित विधायक विनियम प्रणाली
दुनिया में व्यापार साश्वत सत्य है। पुंदाग का साप्ताहिक बाजार हो कि झारखंड का सियासी गलियारा। खरीद-फरोख्त बाजार की अनिवार्य शर्त है। फर्क केवल इतना है कि पुंदाग के साप्ताहिक हाट में वस्तु विनियम प्रणाली चलती है तो वहीं सियासत के गलियारे में विधायक विनियम प्रणाली। दिलचस्प बात तो यह है कि यहां कीमत को अंतर्रात्मा कहते हैं। अब विधायकों की अंतर्रात्मा एनडीए के हक में जागेगी कि महागठबंधन के पक्ष में। यह कहना मुश्किल है। 

रेडिशन ब्लू में विधायकों को मिलेगी वोटिंग की ट्रेनिंग
वैसे, झारखंड में सियासी जानकारों के विमर्श से लेकर सड़क छाप पॉलिटिकल चर्चा तक में झामुमो, कांग्रेस, आरजेडी और वामदल के विधायकों के बिदकने की आशंका जताई गई थी। उम्मीदवारी के ऐलान के समय छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तो महागठबंधन के विधायकों को किसी अन्य राज्य में ले जाकर रखने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन सीएम हेमंत ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी जो 140 करोड़ की जनसंख्या वाले मुल्क में सत्ता पर काबिज है, किसने सोचा था कि भाजपा को अपने विधायक होटल में ले जाकर रखने पड़ेंगे।

गढ़वा के विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी कह रहे हैं कि होटल में विधायकों को वोटिंग की ट्रेनिंग दी जायेगी। यहां मॉक-ड्रिल होगा। सियासत के जानकर कह रहे हैं कि ये क्या बला है। 

सत्येंद्रनाथ तिवारी किस सवाल पर झेंपने लगे
गौर कीजिएगा कि यह वही सत्येंद्रनाथ तिवारी हैं जिन्होंने हार्स ट्रेडिंग के आरोपों पर कहा था कि लगता है सत्तारुढ़ दलों के हॉर्सेज काफी कमजोर हैं। उनसे कहिए कि उन्हें कसकर बांधें।

जो भारतीय जनता पार्टी चुनाव के ऐलान के समय ही संख्याबल नहीं होने के बावजूद राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार उतारकर  जीतने का दंभ  भरा करती थी, उसने पहले तो निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को समर्थन दिया और अब विधायकों को 2 दिन पांच सितारा होटल में रख रही है। सियासी जानकार कह रहे हैं कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में जो भारतीय जनता पार्टी इस खेल में शिकारी नजर आ रही थी, अनायास शिकार होने का आभास क्यों देने लगी।

मीडियाकर्मियों ने सवाल भी किया कि, क्या इतने कमजोर हैं कि विधायकों को 2 दिन होटल में नजरबंद करना पड़ रहा है।  राज्यसभा चुनाव में जीत का दंभ भरने वाले नेता झेंप गये।

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