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जामताड़ा के पाकडीह गांव में 7 साल से बंद सोलर जल मीनार, एक चापाकल के सहारे ग्रामीण

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जामताड़ा
हर घर नल जल योजना के तहत गांव घरों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे तो किये जाते है. लेकिन जामताड़ा जिले के पाकडीह गांव में करोड़ों की लागत से बनी पेयजल योजना विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़कर दम तोड़ती नजर आ रही है. पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा सोलर आधारित जल मीनार स्थापित की गई थी. लेकिन पिछले 7 सालों से यह टंकी महज एक शोभा की वस्तु बनकर रह गई है. ग्रामीणों के अनुसार, टंकी लगने के मात्र 6 महीने बाद ही इसमें तकनीकी खराबी आ गई थी, जिसे आज तक ठीक नहीं किया गया. 

टंकी लगने के 6 महीने बाद हुई ख़राब
भीषण गर्मी की दस्तक के साथ ही गांव में पानी का संकट गहरा गया है. पूरे गांव की प्यास बुझाने का जिम्मा अब सिर्फ एक चापाकल पर है, जहां सुबह से ही लंबी कतारें देखने को मिलती हैं. ग्रामीण ने कहा कि टंकी लगने के बाद सिर्फ 6 महीने चली. हमने कई बार शिकायतें कीं, लेकिन विभाग कान में तेल डालकर सोया है. कोई सुनवाई नहीं हो रही. गर्मी में बुरा हाल है. एक ही चापाकल के भरोसे पूरा गांव है. प्रशासन से हमारी मांग है कि इसे तुरंत चालू किया जाए, वरना स्थिति और खराब होगी.
अधिकारियों से सिर्फ मिला आश्वासन: ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने प्रखंड कार्यालय से लेकर विभाग के अधिकारियों तक कई बार गुहार लगाई, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ हासिल नहीं हुआ. अब ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है. देखना होगा कि क्या इस खबर के बाद प्रशासन की नींद टूटती है या पाकडीह के लोग इस तपती गर्मी में भी बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करने को मजबूर रहेंगे.
 

 

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