द फॉलोअप डेस्क
जामताड़ा जिले से समाज के वंचित वर्गों के लिए एक राहत भरी और उत्साहजनक खबर सामने आई है। अब जिले के हरिजन, आदिवासी, दिव्यांग और विधवा महिलाएं अपनी आर्थिक तंगी को पीछे छोड़कर आत्मनिर्भरता की राह पर अग्रसर होंगी। मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत जिले में पशुपालन को स्वरोजगार का मुख्य जरिया बनाया जा रहा है। पशुपालन विभाग ने एक सराहनीय पहल करते हुए लक्षित समूहों को 90 प्रतिशत के भारी अनुदान पर बत्तख पालन से जोड़ने की शुरुआत की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है, ताकि वह किसी पर निर्भर ना रहकर अपना गुजर-बसर स्वयं कर सकें। योजना के पहले चरण में जामताड़ा प्रखंड के 30 पशुधन मित्रों को 30-30 यूनिट बत्तख के चूजे वितरित किए गए हैं।
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प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि यह योजना लोगों को अपने पैरों पर खड़े करने की एक ठोस कोशिश है। विभाग ना केवल चूजे वितरित कर रहा है, बल्कि उनके स्वास्थ्य और रखरखाव की भी पूरी जिम्मेदारी ले रहा है। पशुधन मित्रों को प्रशिक्षित किया गया है, ताकि किसी भी बीमारी या समस्या की स्थिति में वे तुरंत विभाग से संपर्क कर सकें। इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पारदर्शिता है। लाभुकों का चयन सीधे ग्राम सभा के माध्यम से किया जाता है, जहाँ से प्रस्ताव पारित होकर विभाग तक पहुँचता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि लाभ वास्तव में जरूरतमंद व्यक्ति तक ही पहुँचे। वहीं प्रशासन का लक्ष्य है कि जल्द ही इस योजना को पूरे जिले में व्यापक स्तर पर लागू किया जाए। बत्तख पालन के माध्यम से अब जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में ना केवल पोषण के स्तर में सुधार होगा, बल्कि कम लागत में अच्छी खासी कमाई कर गरीब परिवार खुशहाली की ओर कदम बढ़ाएंगे।
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