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सत्ता और सचिवालय का सच : सांसद सांस्कृतिक महोत्सव का संदेश

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जीतेंद्र कुमार/ रांची
पिछले दिनों 1 मई को ऑड्रे हाउस रांची में सांसद सांस्कृतिक महोत्सव सह स्वदेशी मेला का आयोजन किया गया. इस मेले की कुछ राजनीतिक खासियते रही. भाजपा सांसद संजय सेठ की पहल पर आयोजित इस महोत्सव में राज्य के संवैधानिक प्रमुख राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी शामिल हुए. मुख्यमंत्री का शामिल होना कुछ अलग संदेश देने लगा है. क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर और वाले बैनर के नीचे मुख्यमंत्री की उपस्थिति कुछ और कहने लगी. मुख्यमंत्री ने स्वदेशी स्वदेशी अपनाने पर जोड़ देकर संस्कृति को राजनीति से भी जोड़ा.सामान्य समझ में यह एक महोत्सव था और मुख्यमंत्री के नाते हेमंत सोरेन की उपस्थिति एक औपचारिकता. लेकिन मुख्यमंत्री के इस समारोह में शामिल होने के बाद सत्ता की गलियारे में इस सांस्कृतिक महोत्सव को राजनीतिक संस्कृति के बदलाव के रूप में भी देखा जाने लगा है. इसलिए भी कि, यह कार्यक्रम विशुद्ध रूप से भाजपा, भाजपा के सांसद, भाजपा के केंद्रीय मंत्री के प्रयास और पहल पर आयोजित था. उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चर्चा चारों ओर हावी थी. बावजूद मुख्यमंत्री इसमें शामिल होकर कार्यक्रम को न सिर्फ सफल बनाने में सहयोग किया बल्कि शारीरिक रूप उपस्थित होकर मजबूती भी प्रदान की. सत्ता समीकरण के जानकार अब इसे झारखंड की राजनीतिक संस्कृति के बदलाव से जोड़ रहे हैं. वह केवल समय और काल की प्रतीक्षा कर रहे हैं. कल पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के परिणाम आ जाएंगे. फिर झारखंड में राज्यसभा चुनाव का बिगुल भी बज जाएगा. अब देखना है कि सांस्कृतिक बदलाव में और कौन-कौन सा बिगुल बजता है. कौन नाच और कौन गाता है.

 

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