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असम में बोले हेमंत सोरेन, इस बार भाजपा को पता चल जाएगा कि राजनीति आदिवासियों को भी आती है

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द फॉलोअप डेस्क
अप्रैल मई में असम में विधानसभा का चुनाव संभावित है। इसको केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मंगलवार को असम पहुंचे। वहां उन्होंने कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित किया। इस क्रम में वह भाजपा का नाम लिए बगैर उस पर खूब बिफरे। उन्होंने कहा कि इस बार के चुनाव में ऐसा प्रयास होगा कि उन्हें समझ में आ जाएगा कि राजनीति सिर्फ उन्हीं को नहीं आती। दलितों आदिवासियों को भी आती है। मुख्यमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत चाय से की। उन्होंने कहा कि असम ही नहीं पूरे देश के चाय का व्यापार केवल आदिवासियों की  बदौलत चलता है। अगर आदिवासियों ने अपना हाथ खींच लिया तो यह व्यापार ही ठप हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इस व्यापार को संचालित करने के बदले आदिवासियों को क्या मिलता है, किसी से छुपा नहीं है। उन्होंने झारखंड से असम के आदिवासियों को जोड़ा। कहा कि झारखंड में भी हक और अधिकार की लंबी लड़ाई लड़ी गयी। लेकिन जब हक और अधिकार नहीं मिला तो अलग राज्य का बिगुल फूंका गया। इसके लिए संकल्प लिया गया। यह जानते हुए कि इस लड़ाई में अग्रिम पंक्ति के सभी नेता मारे जाएंगे। दूसरी पंक्ति के जेल जाएंगे। तब तीसरी पंक्ति के नेता कार्यकर्ता झारखंड सजाएंगे और संवारेंगे। वही हुआ। उन्होंने आह्वान किया कि इसी तरह का संकल्प असम के आदिवासियों, दलितों और अल्पसंख्यकों को भी लेना होगा। एक छत के नीचे आना होगा।


हेमंत सोरेन ने वहां के लोगों को समझाया। हम आर्थिक, सामाजिक और बौद्धिक रूप से अपने राजनीतिक दुश्मन से कमजोर हैं। अब लड़ कर लेंगे झारखंड वाला नारा काम नहीं आएगा। अब बौद्धिक और कानूनी रूप से भी हमें लड़ाई लड़नी पड़ेगी। इसके लिए एकजुट होना होगा। क्योंकि असम में सत्ता में काबिज लोग कुछ देनेवाले नहीं है। क्योंकि ये व्यापारी हैं। व्यापारी हमेशा अपने लाभ का न्यूनतम हिस्सा भी मजबूरी में देता है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इन्हें केवल गुजरात, मुंबई और दिल्ली का विकास करना है। इस विकास के लिए केवल मजदूर चाहिए। और ये मजदूर आदिवासी, दलित और अल्पसंख्यक ही बने रहें। उन्होंने कहा कि झारखंड में सबसे अधिक खनिज संपदा है। लेकिन इसकी हालत क्यों बदतर हो गयी। जहां खनिज नहीं है, वे विकसित राज्य बन गए। क्योंकि झारखंड के विकास को केंद्र में रख कर कभी नीतियां नहीं बनने दी गयी। 


हेमंत सोरेन ने बार बार दुहराया कि इसका बदला लेने का एक ही तरीका है, चुनाव के समय सजग होना। अपने अधिकार और सम्मान के लिए वोट का सार्थक प्रयोग करना। वोट से ही सत्ता मिलती है और सत्ता से किसी समुदाय और समाज की तस्वीर और तकदीर बदलती है। उन्होंने यहां भी दुहराया कि उनकी जेब में निर्वाचन आयोग के अलावा कई अन्य तरह की संस्थाएं हैं। वे ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स के माध्यम से डराते-धमकाते हैं। ईरान पर जारी हमले की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अभी तो गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ी है। आनेवाले दिनों में चावल, दाल, कपड़ा, सबकी कीमतें बढ़ेंगी और इसका असर उन पर नहीं होगा।  उन्होंने अंत में असम के आदिवासियों को आश्वस्त किया कि उन्हें एसटी का दर्जा दिलाने का वह रास्ता निकालेंगे। सोनार का सौ चोट और लोहार के एक चोट की याद दिला देंगे।

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