द फॉलोअप डेस्क
झरखंड में सरकार द्वारा दिव्यांगजनों के लिए कई तरह की योजनाएं चलाने और उन्हें सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने का दावा किया जाता है, लेकिन कई मामलों में जमीनी हकीकत इन दावों से अलग नजर आती है। ऐसा ही एक मामला सिमडेगा जिले के जलडेगा प्रखंड के कुटुंगिया पंचायत अंतर्गत एक गांव से सामने आया है, जहां 19 वर्षीय दिव्यांग युवती शांति जोजो आज भी सरकारी योजनाओं से वंचित होकर गरीबी और लाचारी में जीवन बिताने को मजबूर है। शांति जोजो स्वर्गीय सोमा जोजो की पुत्री है, और कई वर्षों से दिव्यांगता की मार झेल रही है। युवती के भाई अमृत जोजो ने बताया कि शांति पहले गांव के स्कूल में पढ़ने जाती थी और उस समय कक्षा दो में पढ़ रही थी। इसी दौरान वह गंभीर रूप से बीमार पड़ गई, जिसके बाद वह चलने-फिरने में असमर्थ हो गई।

परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर होने के कारण उसका समुचित इलाज नहीं हो सका। अमृत जोजो ने बताया कि उस समय उन्हें किसी भी प्रकार की सरकारी सहायता नहीं मिली और न ही किसी ने सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। समय बीतता गया, लेकिन आज तक शांति जोजो को किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि शांति जोजो का अब तक दिव्यांगता प्रमाण पत्र भी नहीं बन पाया है, जबकि वह पूरी तरह से दिव्यांग और असहाय अवस्था में है। प्रमाण पत्र नहीं बनने के कारण उसे दिव्यांग पेंशन सहित अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। परिवार का कहना है कि अब तक कोई जनप्रतिनिधि या संबंधित अधिकारी उनकी स्थिति देखने तक नहीं पहुंचे हैं और न ही किसी ने मदद दिलाने की पहल की है।
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