गिरिडीह
गिरिडीह जिले के जमुआ प्रखंड अंतर्गत मघाकला पंचायत के काजिमगहा गांव में शनिवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया। बरसात के बीच जर्जर कच्चा मकान अचानक भरभराकर ढह गया, जिसके मलबे में दबकर वृद्ध महिला हीरिया देवी गंभीर रूप से घायल हो गईं। हादसे में उनके पैर में फ्रैक्चर हो गया। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए।
ग्रामीणों ने मलबा हटाकर बचाई जान
स्थानीय ग्रामीणों और माले नेता असगर अली ने तुरंत मलबा हटाकर महिला को बाहर निकाला। इसके बाद उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जमुआ पहुंचाया गया। प्राथमिक जांच में डॉक्टरों ने उनके पैर में फ्रैक्चर की पुष्टि की। फिलहाल उनका इलाज जारी है। घटना के बाद माले नेता असगर अली ने प्रशासन और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यदि जिला प्रशासन और सरकार ने समय रहते गरीब महिला को पक्का आवास उपलब्ध कराया होता, तो यह हादसा टाला जा सकता था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल पहुंचने के बाद भी समय पर डॉक्टर उपलब्ध नहीं थे, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही उजागर हुई है। 
बरसात में जर्जर मकानों में रहने को मजबूर गरीब परिवार
असगर अली ने कहा कि गरीबों के लिए चलाई जा रही योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रह गई हैं। उन्होंने इस घटना के लिए सरकार, स्थानीय विधायक और सांसद को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि पात्र लोगों को समय पर योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में जर्जर कच्चे मकानों में रहना बेहद खतरनाक हो गया है। कई परिवार हर पल हादसे के डर में जी रहे हैं। उनका आरोप है कि कई बार आवास की मांग करने के बावजूद समय पर लाभ नहीं मिलने के कारण ही आज एक बुजुर्ग महिला गंभीर रूप से घायल हुई है। 
बेहतर इलाज, आर्थिक सहायता और पक्का आवास की मांग
मघाकला पंचायत के मुखिया अबूजर नोमानी ने बताया कि हीरिया देवी का नाम आवास सूची में शामिल है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रखंड विकास पदाधिकारी से बात कर उन्हें अंबेडकर आवास योजना का लाभ दिलाने का प्रयास किया जाएगा। घटना के बाद ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से घायल महिला के बेहतर इलाज, आर्थिक सहायता और तत्काल पक्का आवास उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया है कि जब हीरिया देवी का नाम आवास सूची में शामिल था, तो अब तक उन्हें योजना का लाभ क्यों नहीं मिला। ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले में सरकारी उदासीनता की जांच होनी चाहिए।