द फॉलोअप डेस्कः
झारखंड कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष वर्तमान में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ अजय कुमार चाईबासा के एमपी-एमएलए कोर्ट ने एक मामले में बरी कर दिया है। कोर्ट ने सबूतों के अभाव में उनको बरी किया है। उन पर चाईबासा कोर्ट में बिना अनुमति के प्रदर्शन और सरकारी काम में बाधा डालने का मामला चल रहा था। साथ ही नेशनल हाईवे-33 पाराडीह चौक सड़क मरम्मत को लेकर धरना प्रदर्शन, राहगीर के वाहनों का टायर पंचर कर आवागमन को अवरुद्ध करने, सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने का आरोप था। प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी ऋषि कुमार की अदालत ने दोनों पक्षों की दलील को सुना दोनों पक्ष को सुनने के बाद डॉ अजय कुमार को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। उनके साथ फिरोज खान को भी बरी किया गया है।

2013 का है मामला
बता दे कि डॉ अजय कुमार पर यह मुकदमा 27 अक्टूबर 2013 को आजाद थाना में विशेष पदाधिकारी सुशील कुमार के द्वारा दर्ज किया गया था। मुकदमा धारा 143, 323, 342, 353 के अंतर्गत दर्ज कराया गया था। इन लोगों पर अभियोजन पक्ष से मात्र चार गवाह ने अपना बयान दर्ज करवाया था। जबकि न्यायालय के समक्ष सूचक सुशील कुमार अनुसंधानकर्ता चंदर टुडू थाना प्रभारी, विद्या सिंह एवं लाल बहादुर सिंह ने अपने गवाह नहीं दिए। बचाव पक्ष के अधिवक्ता सुधीर कुमार , पप्पू, बाबू दरीपा, विमल कुमार व अन्य अधिवक्ता थे। बता दें कि डॉ अजय कुमार जो कि कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता के साथ-साथ त्रिपुरा, सिक्किम और नागालैंड के प्रभारी भी हैं। दरअसल अजय कुमार और फिरोज खान की मांग थी कि खराब सड़क की मरम्मत की जाए। इस संबंध में 27 अक्टूबर 2013 को आजाद नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई पदाधिकारी सुशील कुमार ने आरोप लगाया कि वह सरकारी कार्य में बाधा डाल रहे हैं। उन्होंने डॉ अजय कुमार, झारखंड विकास मोर्चा के पूर्व जिला अध्यक्ष फिरोज खान समेत अज्ञात 40 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। प्राथमिकी में कहा गया कि पूर्व सांसद डॉ अजय कुमार ने समर्थकों के साथ पार्टी का बैनर लेकर nh-33 की मरम्मत की मांग को लेकर आर्थिक नाकेबंदी किया था।
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