द फॉलोअप, रांची
राज्य सूचना आयोग में चार सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के बाद भी यह डिफंक्ट स्थिति में है। 70 दिन बाद भी सूचना आयोग में अपील की सुनवाई शुरू नहीं हो सकी। क्योंकि मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति नहीं हो सकी है। यहां मालूम हो कि 10 जून को राज्यपाल की स्वीकृति के बाद अनुज कुमार सिन्हा,तनुज खत्री,अमूल्य नीरज खलखो और शिवपूजन पाठक को सूचना आयुक्त के पद पर नियुक्त किया गया था। एक जुलाई 2026 को राज्यपाल ने नव नियुक्त सूचना आयुक्तों को शपथ दिलायी थी। लेकिन शपथ लेने के बाद नव नियुक्त सूचना आयुक्त कार्यालय जाते हैं। दिन भर बैठते हैं। पुराने फाइलों को उलटा-पुलटा कर देखते हैं और अपने आवास लौट आते हैं। सूचना आयोग में दायर किसी भी अपील याचिका पर सुनवाई नहीं कर पा रहे।
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सुनवाई शुरू नहीं होने का क्या है कारण
सूचना अधिकार अधिनियम के अनुसार किस अपील याचिका की सुनवाई कौन से सूचना आयुक्त करेंगे, कार्य का यह बंटवारा करने का अधिकार केवल मुख्य सूचना आयुक्त में निहीत है। अब मुख्य सूचना आयुक्त ही नहीं हैं तो कार्यों का बंटवारा ही नहीं हो पा रहा है। किसी नयी अपील याचिका को भी कौन देखेंगे, यह भी मुख्य सूचना आयुक्त ही तय करते हैं। वैसे कार्यकारी व्यवस्था के तहत राज्यपाल कार्य बंटवारा के लिए किसी को जिम्मेदारी दे सकते हैं। लेकिन कानूनी दृष्टि से इसे उपयुक्त नहीं माना गया। सवाल खड़ा किया गया कि इस तरह की वैकल्पिक व्यवस्था के तहत सूचना आयुक्तों द्वारा दिए गए फैसले को अगर हाईकोर्ट में चुनौती दी गयी तो वहां अड़चन पैदा हो सकता है। परिणाम हुआ कि नव नियुक्त सूचना आयुक्त बगैर काम के अपना समय व्यतीत करते जा रहे हैं।
छह सालों से नहीं हो रही सूचना आयोग में सुनवाई
अंतिम पूर्णकालिक मुख्य सूचना आयुक्त (Chief Information Commissioner) आदित्य स्वरूप (Aditya Swaroop) थे। वे सेवानिवृत्त IAS अधिकारी थे और 24 अप्रैल 2015 को मुख्य सूचना आयुक्त बने थे। उनका कार्यकाल 30 नवंबर 2019 को समाप्त हुआ। इसके बाद सूचना आयुक्त हिमांशु शेखर चौधरी को 27 दिसंबर 2019 को कार्यवाहक मुख्य सूचना आयुक्त बनाया गया था। वे 8 मई 2020 को सेवानिवृत्त हुए, जिसके बाद आयोग के सभी पद खाली हो गए। इसके बाद 10 जून को राज्य सरकार ने चार सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की थी। इस तरह पिछले छह साल से राज्य सूचना आयोग में दायर अपील याचिकाओं पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इस कारण आयोग में लगभग 25 हजार से अधिक अपील याचिकाएं लंबित है।
