द फॉलोअप डेस्क
पलामू में गर्भवती शिक्षिका को समय पर अवकाश नहीं मिलने और गर्भ में नवजात की मौत के मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इस घटना को अत्यंत गंभीर और अमानवीय बताया है। उन्होंने कहा कि पलामू जिले में कार्यरत एक गर्भवती शिक्षिका ने चिकित्सकीय सलाह के अनुसार शारीरिक देखभाल और आराम के लिए विभाग से अवकाश का आवेदन दिया था, लेकिन आरोप है कि अवकाश स्वीकृत करने के एवज में जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय की ओर से 50 हजार रुपये रिश्वत की मांग की गई।

भागदौड़ के बीच गर्भ में बच्चे की हुई मौत
बाबूलाल मरांडी ने अपने पोस्ट में कहा कि अवकाश स्वीकृत नहीं होने के कारण गर्भवती शिक्षिका को लगातार विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़े। उनका कहना है कि इसी भागदौड़ और मानसिक प्रताड़ना के बीच गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई। उन्होंने इस पूरे मामले को बेहद संवेदनशील बताते हुए कहा कि यदि आरोप सही हैं तो यह सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है और इसकी निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है।

उपायुक्त और पुलिस प्रशासन से की तत्काल कार्रवाई की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने पलामू के उपायुक्त और पुलिस प्रशासन से पूरे मामले का तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि जांच में कोई अधिकारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। बाबूलाल मरांडी ने कहा कि किसी भी कर्मचारी को उसके वैधानिक अधिकार के बदले रिश्वत मांगकर प्रताड़ित करना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता।