रांची:
झारखंड के सहायक पुलिसकर्मियों का भविष्य एक बार फिर अधर में लटक गया है। सूचना मिली है कि सहायक पुलिसकर्मियों को सेवामुक्त करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ऐसे में सहायक पुलिसकर्मी एक बार फिर आंदोलन के मूड में हैं।
12 नक्सल प्रभावित जिलों में हुई थी नियुक्ति
झारखण्ड के 12 नक्सल प्रभावित जिलों में पदस्थापित करीब 25 सौ सहायक पुलिसकर्मियों पर फिर से सेवा मुक्ति का तलवार लटकने लगा है। दुमका के एसपी ने डीआईजी को एक पत्र लिखा है। उस पत्र में उन्होंने डीआईजी से मार्गदर्शन मांगा है. एसपी ने पत्र में लिखा है कि विज्ञापन संख्या 01 / 2017 के तहत दुमका जिला बल में 2 वर्ष के लिए अनुबंध के आधार पर नियुक्त सहायक पुलिस कर्मियों की सेवा के संबंध में मार्गदर्शन करने के संबंध में। एसपी ने लिखा है कि दुमका जिला में 200 सहायक पुलिसकर्मियों की नियुक्ति 2 वर्ष के लिए अनुबंध पर की गई थी। ये अवधि पूरी हो चुकी है। इनको 3 बार अवधि विस्तार भी दिया जा चुका है।
200 सहायक पुलिसकर्मियों में से 3 त्यागपत्र दे चुके हैं वहीं 2 की मौत हो चुकी है। फिलहाल 193 सहायक पुलिसकर्मी ही सेवा में हैं। 10 अगस्त 2022 को इनका अनुबंध खत्म हो जायेगा। ऐसे में इन्हें सेवामुक्त करने के संबध में मार्गदर्शन दिया जाये। दुमका में सहायक पुलिस को सेवामुक्त करने की खबर ने बाकी जिलों में भी सहायक पुलिसकर्मियों की धड़कने बढ़ा दी हैं। उनको भविष्य अंधकारमय लगने लगा है। आखिर वे क्या करें।

मानदेय वृद्धि और समायोजन की मांग
गौरतलब है कि सहायक पुलिसकर्मी वेतनमान में बढ़ोतरी और समायोजन की दो मुख्य मांग को लेकर 2 बार आंदोलन कर चुके हैं। दोनों बार इन सहायक पुलिसकर्मियों को साथी पुलिसवालों की लाठी के प्रहार और आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। कुछ महीने पहले की ही बात है। तब मोरहाबादी मैदान में आंदोलन कर रहे सहायक पुलिसकर्मियों को आश्वासनों की चाशनी मिली थी। तब मांडर के विधायक रहे बंधु तिर्की ने महज 15 दिन का वक्त मांगा था ताकि उनकी समस्या का समाधान हो सके।
हालात ऐसे हैं कि वो 15 दिन कब के हवा हो चुके हैं लेकिन समाधान तो छोड़िये, उल्टा इन्हें हटाने की बात हो रही है। उस समय आंदोलनरत सहायक पुलिसकर्मियों से तकरीबन सभी पॉलिटिकल पार्टियों के नेताओं ने मुलाकात की थी और ढेरों वादे किये थे, लेकिन राजनीति में वादों का महत्व ही क्या है।

क्या एक और आंदोलन की गवाह बनेगी रांची
सेवामुक्त किए जाने की आशंका से घबराए सहायक पुलिसकर्मियों का कहना है कि हमें 2 महीने का समय दिया गया था लेकिन 7 महीना बीत चुका लेकिन कुछ पता नहीं कि उनका क्या होने वाला है। सहायक पुलिसकर्मियों ने बताया कि बीते 5 साल में उनसे प्रतिदिन 24 घंटे ड्यूटी ली गई। प्रतिमाह महज 10 हजार रुपया वेतन दिया गया। इनका कहना है कि 5 साल में तो निजी कंपनियां भी इन्क्रीमेंट देती है लेकिन सरकार ने महज 10 हजार रुपये में उनका दोहन किया। मौसम कैसा भी हो। उन्हें हमेशा ड्यूटी के लिए तैयार रहने को कहा गया। हमने कभी शिकायत भी नहीं की लेकिन हमाारे साथ छल किया गया।
पंचायत चुनाव में भी लगाई गई थी इनकी ड्यूटी
पंचायत चुनाव में भी सहायक पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई। चुनाव में ड्यूटी करने वाले बाकी कर्मियों को आयोग की तरफ से अतिरिक्त पैसा मिलता है लेकिन सहायक पुलिस को इसका लाभ नहीं मिला। इनका आरोप है कि सरकार ने पांच साल केवल शोषण ही किया है। वे इस उम्मीद में हर बात सहते रहे कि मामले का समाधान निकलेगा लेकिन केवल निराशा ही हाथ लगी।

अब तक 2 बार आंदोलन कर चुके हैं सहायक पुलिस
दरअसल, झारखंड में रघुवर सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2017 में 12 नक्सल प्रभावित जिलों में सहायक पुलिस कर्मियों की नियुक्ति 10 हजार रुपये मानदेय के आधार पर की गई थी। 12 नक्सल प्रभावित जिलों में कुल 2500 सहायक पुलिस कर्मियों की नियुक्ति की गई थी।
नियुक्ति के बाद से ही सहायक पुलिसकर्मी युवा जोश के साथ नक्सल प्रभावित जिलों में सेवा देते रहे लेकिन अपनी मांग को लेकर उन्हें हमेशा आंदोलन करना पड़ा है। अपनी सेवा अवधि बढ़ाने और अन्य मांग के साथ अब तक दो बार सहायक पुलिसकर्मी आंदोलन कर चुके हैं।
पहली बार जब रांची के मोरहाबादी मैदान में सहायक पुलिसकर्मियों ने आंदोलन किया था तो सरकार के मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने ठोस आश्वासन देकर उनका आंदोलन समाप्त करवाया था। उसके बाद पिछले वर्ष जब रांची के मोरहाबादी मैदान में सहायक पुलिसकर्मियों ने आंदोलन किया था तब बंधु तिर्की जो अब पूर्व विधायक हो चुके हैं मध्यस्थता कर आंदोलन को समाप्त करवाया था।
सहायक पुलिसकर्मियों की मुख्य मांगें क्या हैं!
बंधू तिर्की ने जब आंदोलन समाप्त करवाया था. 2 नवम्बर 2021 को सहायक पुलिसकर्मियों और गृह विभाग के सचिव, रांची के आईजी के बीच एक सहमति पत्र बनी थी। इस सहमति पत्र में और कुल 8 सूत्री मांगों पर सहमति बनी थी। कहा गया था कि अगले 8 दिनों में मांगों पर गंभीरता पूर्वक विचार किया जायेगा।
8 सूत्री मांगों में सहायक पुलिसकर्मियों की सेवा, मानदेय, राज्य स्तर पर यूनिफार्म रिजर्वेशन , दुर्घटना होने पर शारीरिक दक्षता परीक्षण एवं चिकित्सीय परीक्षा में छूट एवं ड्यूटी के दौरान दुर्घटना ग्रस्त होने पर मुआवजा राशि एवं जिला से बाहर प्रतिनियुक्ति पर TA/DA के बारे में , आंदोलन के दरमियान हुए केस एवं क़ानूनी कार्रवाई , अवकाश एवं आंदोलन की अवधि के मानदेय भुगतान करने। देखना होगा कि यदि इस बार भी आंदोलन हुआ तो सहायक पुलिसकर्मियों को ठोस आश्वासन से इतर भी कुछ मिलेगा या नहीं।