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एसीएस फर्जी और तय मानक के बगैर चल रहे फार्मेसी कॉलेजों की जांच कर अविलंब रिपोर्ट देंः स्वास्थ्य मंत्री 

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द फॉलोअप, रांची

झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर इरफान अंसारी ने राज्य में संचालित फार्मेसी कॉलेजों को लेकर बड़ा और सख्त रुख अपनाते हुए अपर मुख्य सचिव अजय कुमार को निर्देश दिया है कि पूर्व में बिना एनओसी एवं आवश्यक मानकों के संचालित हो रहे सभी फार्मेसी कॉलेजों की विस्तृत रिपोर्ट अविलंब प्रस्तुत की जाए। मंत्री ने स्पष्ट रूप से पूछा है कि आखिर किन परिस्थितियों, मानकों और प्रशासनिक आधारों पर ऐसे संस्थानों को संचालन की अनुमति दी गई, जो पर्याप्त भवन, प्रयोगशाला, शिक्षकों, आधारभूत संरचना एवं आवश्यक संसाधनों के बिना चल रहे थे। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल संस्थानों तक सीमित नहीं है, बल्कि हजारों छात्रों के भविष्य और राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की गुणवत्ता से सीधा जुड़ा हुआ है। मालूम हो कि द फॉलोअप ने 8 मई को राज्य में 70 फार्मेसी कॉलेजों की उप सचिव सचिव रंजीत लोहरा की अध्यक्षता वाली जांच समिति की रिपोर्ट को उजागर किया था। उसमें 34 कॉलेज फर्जी तरीके से संचालित हो रहे हैं और 34 कॉलेज तय मानदंड को पूरा नहीं कर रहे हैं। सभी 70 फार्मेसी कॉलेज जहां डी फार्मा की पढ़ाई हो रही है, 2022 में विभाग द्वारा जारी आदेश के बाद भी एनओसी नहीं लिया है।

डॉ. इरफान अंसारी ने पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं गहन जांच के लिए विशेष टीम गठित करने का भी निर्देश दिया है, ताकि सभी तथ्यों की गंभीरता से पड़ताल की जा सके। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान यदि किसी स्तर पर लापरवाही, मिलीभगत, नियमों की अनदेखी या भ्रष्टाचार सामने आता है, तो संबंधित व्यक्तियों एवं संस्थानों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने दो टूक कहा कि “स्वास्थ्य और मेडिकल शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों पर सरकार सख्त कार्रवाई करेगी।” मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार मेडिकल एवं फार्मेसी शिक्षा को बढ़ावा देने के पक्ष में है, लेकिन गुणवत्ता और नियमों से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। जो संस्थान सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों एवं प्रक्रियाओं का पालन करते हुए आवेदन करेंगे, उनके मामलों पर सकारात्मक एवं त्वरित विचार किया जाएगा।

डॉ. अंसारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य में संचालित सभी फार्मेसी संस्थानों की मान्यता, आधारभूत संरचना, फैकल्टी, लैब सुविधा एवं छात्र हित से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी छात्र को परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत, पारदर्शी, जवाबदेह और आधुनिक बनाना है। स्वास्थ्य विभाग में सुधार की दिशा में लगातार कई बड़े कदम उठाए जा रहे हैं और आगे भी जनता एवं छात्रों के हित में निर्णायक फैसले लिए जाते रहेंगे। उन्होंने आगे कहा है कि वह लगातार प्रयास कर रहा हैं कि झारखंड का स्वास्थ्य विभाग देश के बेहतर राज्यों की श्रेणी में खड़ा हो। पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता हमारी सरकार की पहचान बनेगी।

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