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साधना : आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ने किया महापारणा, पहली वाणी सुनने को बेताब थे श्रद्धालु 

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गिरिडीहः
पारसनाथ मधुबन में  आज महापारणा महोत्सव का आयोजन किया गया। सुबह से ही जैन समुदाय के लोगों में उत्साह देखने को मिल रहा था। आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज का की पहली वाणी को सुनने का श्रद्धालु बेताब थे। महाराज जी के मौन व्रत टूटने के बाद उनके प्रवचन का जैनी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। शनिवार की सुबह 8.13 बजे उन्होंने पारसनाथ पर्वत पर महापारणा किया। इस दौरान पारसनाथ पर्वत का माहौल बेहद सुंदर था। पूरा पर्वत महाराज के जयकारों से गूंज उठा। भक्त  महाराज जी की एक झलक पाने को बेताब थे। वह जैसे ही गुफा से बाहर आए श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाने शुरू कर दिए। इसके बाद उन्होंने सबका अभिनंदन किया और मंदिर के बाहर महापारणा किया। जब उनको डोली में बिठाकर नीचे उतारा जा रहा था उस वक्त हजारों की संख्या में जैन समाज के लोग उनके आगे पीछे थे। पूरे रास्ते में महाराज के स्वागत के लिए तैयारी की गई थी। पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत किया गया। 


10 माह से थे मौन में 
मालूम हो कि आचार्य प्रसन्न सागर महाराज 10 माह  से मौन व एकांतवास में रहकर साधना कर रहे थे। ऐसी साधना करने वाले भगवान महावीर के बाद अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागर महाराज एकमात्र दिगंबर संत है। इसलिए महाराज के महापारणा कार्यक्रम को इतना भव्य रूप दिया गया। उनके स्वागत के लिए सड़कों को फूलों से बिछा दिया गया। इसके लिए विशेष रूप से एक क्विंटल फूल मंगाए गए थे।