द फॉलोअप डेस्क:
इनामी नक्सली अभ्यास भुइयां ने गुरुवार को गया पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया है। भुइयां झारखंड और बिहार में वांटेड था। अभ्यास भुइयां पर 15 लाख का इनाम था। नक्सली पर झारखंड में 15 लाख का और बिहार में 25 हजार रुपये का इनाम था। भुइयां भाकपा माओवादी के रीजनल कमेटी का मेंबर है। सरेंडर के दौरान भुइयां ने अपने हथियार भी पुलिस के सामने रख दिये हैं। नक्सली ने शहर के रामपुर थाना क्षेत्र स्थित सीआरपीएफ 159 बटालियन के प्रांगण में सीआरपीएफ के कमांडेंट कुमार मयंक एवं गया के एसएसपी आशीष भारती के समक्ष सरेंडर किया। जानकारी के मुताबकि अभ्यास भुइयां वही नक्सली है जिसले नवम्बर 2021 में गया जिले के डुमरिया थाना क्षेत्र के मोनबार गांव में चार लोगों को फंदे से लटका दिया था। इसके बाद घर को बम से उड़ा दिया था। वारदात के बाद नक्सलियों ने घर के बाहर एक पर्चा भी छोड़ा था। जिसमें बदला लेने के लिए इस परिवार के सदस्यों की हत्या की बात कही गई है।

कई बड़ी घटना को दे चुका है अंजाम
अभ्यास भुइयां मूल रूप झारखंड के चतरा जिले के प्रतापपुर थाना क्षेत्र का रहने वाला है। साल 2003 में ही वह नक्सली संगठन से जुड़ था। वर्ष 2015 में उसे रीजनल कमांडर बनाया गया। वह बिहार-झारखंड में दर्जनों लूट, हत्या जैसे कांडों को अंजाम दे चुका है। झारखंड सरकार द्वारा इसके ऊपर 15 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। वहीं बिहार में भी इसके ऊपर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था। कुछ दिन पहले ही सीआरपीएफ जिला पुलिस से संपर्क कर उसने सरेंडर करने की बात कही।

सुरक्षाबल नहीं कर पाए थे गिरफ्तार
बता दें कि अभ्यास भुईया आज तक सुरक्षाबलों की गिरफ्त में नहीं आया था। भुइयां की गिरफ्तारी के लिए सुरक्षाबलों ने कई बार ऑपरेशन चलाए, लेकिन यह हर बार बचने में कामयाब रहा। कई मौके पर मुठभेड़ भी हुए, लेकिन यह बच निकलता था। इस बीच 20 वर्षों तक संगठन में रहने के बाद उसने सुरक्षा बलों के अधिकारियों से आत्मसमर्पण के लिए संपर्क साधा और छकरबंधा के इलाके से सुरक्षित निकलने की बात सामने रखी। उसके इन बातों को लेकर छकरबंधा के इलाके से निकाल कर लाया गया और फिर विधिवत रूप से गुरुवार को सरेंडर कर दिया।

युवाओं को बहला कर किया जाता है शामिल
अभ्यास ने सरेंडर करने के बाद कहा कि परिवार के भविष्य को लेकर उसने सरेंडर किया है। गया एसएसपी आशीष भारती ने बताया कि दुर्दात नक्सली अभ्यास भुईया ने सरेंडर कर दिया है। इसके खिलाफ बिहार- झारखंड में कई नक्सली मामले दर्ज हैं। इसके सरेंडर करने के बाद नियमानुसार आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी और पुनर्वास योजना का लाभ दिया जाएगा। इधर सीआरपीएफ 159 बटालियन के कमांडेंट कुमार मयंक ने कहा कि नक्सलियों द्वारा बहुत सारे युवाओं को दिग्भ्रमित किया जाता है, इसके साथ ही युवाओं को संगठन में शामिल करा लिया जाता है।