गुमलाः
फीफा अंडर-17 विश्व कप का मैच आज से शुरू होने वाला है। इसबार झारखंड की छह बेटियों को नेशनल टीम में जगह मिली है। टीम की कप्तान झारखंड की ही बेटी अष्टम उरांव है। कल तक यह बात सबको परेशान किये जा रही थी कि अष्टम उरांव के माता-पिता अपनी बेटी को फुटबॉल खेलते हुए नहीं देख पायेंगे क्योंकि उनके घर में टीवी नहीं है, लेकिन आज यह सम्सया खत्म हो गई है। गुमला डीसी ने टीवी और इनवर्टर अष्टम के घर में लगवा दिया है। कल आपने द फॉलोअप के पेज पर अष्टम उरांव के घर की कहानी देखी थी। द फॉलोअप के रिपोर्टर सन्नी शरद सोमवार की सुबह अष्टम उरांव के घर तक पहुंचे थे और उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग कर अष्टम के घर की पूरी कहानी आपको दिखाई थी।

हमने वीडियो के जरिए आपको दिखाने का प्रयास किया है कि अष्टम अष्टम के माता पिता ने किस संघर्ष से अष्टम और उसके भाई बहनों का लालन-पालन किया है। अष्टम के घर में टीवी नहीं थी। इसलिए एक बड़ा चिंता का विषय था कि उसके माता-पिता या आस-पड़ोस के लोग अष्टम का मैच कैसे देखेंगे लेकिन आज जब गुमला डीसी ने टीवी और इनवर्टर लगवा दिया है तो यह समस्या खत्म हो गई है। अब अष्टम के माता-पिता अगर मैच देखने मैदान में ना भी जा पाए तो वह अपनी बेटी का मैच घर में टीवी के जरिए देख पाएंगे।

गरीब परिवार से ताल्लुक रखतीं हैं अष्टम
अष्टम बेहद ही गरीब परिवार से ताल्लुक रखती है। अष्टम के पिता बेंगलुरु जाकर मजदूरी किया करते हैं। फिलहाल पिता गुमला के बिशुनपुर स्थित घर में ही है और यहीं पर वह मजदूरी कर रहे हैं । बता दें कि अष्टम के घर तक जाने के लिए सड़क नहीं थी लेकिन जब यह पता चला कि उसका सिलेक्शन फीफा अंडर-17 में हुआ है तो उसके बाद ही उसके घर के सामने से सड़क बन रही है। वह भी अष्टम के नाम पर और सबसे खास बात यह है कि इस सड़क में जो मजदूर काम पर लगे हुए हैं उसमें अष्टम के माता-पिता भी शामिल हैं।

अष्टम के माता-पिता को हर दिन 250 रुपये मजदूरी मिलती है। अष्टम की मां ने बताया कि उन्होंने बेहद ही कष्ट से अष्टम को पाला है। खाने के लिए भी बहुत अच्छा खाना वह अपने बच्चों को नहीं दे पाती हैं। आज भी वाह माड़ भात, पानी भात, तो कभी जंगल या खेतों से लाए हुए साग भात को खाकर ही रहती हैं। अष्टम ने अपने पिता से फुटबॉल मैच सीखा है।

अष्टम के पिता ने 2 साल से अपनी बेटी को नहीं देखा है। वह काम करने बेंगलुरु चले जाते हैं तो अष्टम अपने मैच के लिए बाहर रहती है। जब अष्टम अपने गांव आती है तो पिता बेंगलुरु में रहते हैं। अष्टम का सिलेक्शन फीफा अंडर-17 में हो गया है तो पिता अपनी बेटी का चेहरा देखने की तमन्ना लिए वापस आ गए हैं। अष्टम के माता पिता बेहद ही संघर्ष से अपनी बेटी को यहां तक लेकर आये हैं। उनके माता-पिता की दिली इच्क्षा है कि वह अपनी बेटी का मैच मैदान में लाइव देख पाएं।