रांची:
स्वतन्त्रा सेनानी और जिन्नाह के द्विराष्ट्र थ्योरी के प्रखर विरोधी अब्दुल कय्यूम अंसारी की जयंती के अवसर पर शुक्रवार को झारखण्ड प्रदेश मोमिन कॉन्फ्रेंस ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कर्बला चौक स्थित प्रदेश कार्यालय में आयोजित जयंती समारोह में प्रदेश अध्यक्ष आबिद अली, राष्ट्रीय सचिव सगीर अंसारी,प्रदेश महासचिव मुफ़्ती अब्दुल्लाह अज़हर क़ासमी, प्रदेश सचिव मास्टर सिद्दीक़ ,राँची जिला अध्यक्ष शमीम अख्तर आज़ाद, महासचिव सह प्रवक्ता ज़फ़र इमाम अंसारी, उपाध्यक्ष अब्दुल्लाह हबीब समेत अन्य उपस्थित थे।

पाकिस्तान के निर्माण का किया था विरोध
समारोह को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष आबिद अली ने कहा कि देश आजादी की ओर बढ़ रहा था साथ ही इसकी विभाजन की भी रूपरेखा तैयार की जा रही थी। मेरठ में 1945 में एक बैठक हुई जिसमें महात्मा गांधी सहित तमाम बड़े नेता शामिल हुए। बैठक में शामिल होने के लिए क्रांतिकारी अब्दुल कय्यूम अंसारी भी आये थे। उन्होंने खुलेआम पाकिस्तान बनने का विरोध किया था। अब्दुल कय्यूम अंसारी ने विरोध करते हुए बैठक का बाय काट कर दिया था। अब्दुल कय्यूम अंसारी ने न सिर्फ पाकिस्तान के जन्म का विरोध किया बल्कि जिन्ना का भी जम कर विरोध किया था।
16 साल की उम्र में गए जेल: सगीर
संबोधित करते हुए राष्ट्रीय सचिव सगीर अंसारी ने कहा कि अब्दुल कय्यूम अंसारी आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी देश प्रेम को हमेशा याद रखा जाएगा। जिन्ना के घोर विरोधी रहे अब्दुल कय्यूम अंसारी का जन्म 1 जुलाई 1905 को बिहार के ज़िला शाहबाद के कस्बा देहरी आन सान में हुआ था। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की। आज़ादी की लड़ाई में वह उम्र के शुरूआती हिस्से में ही कूद पड़े थे। उन्होंने स्कूल से अपना नाम कटवा लिया था क्योंकि वह अंग्रेजी हुकूमत का था। कुछ छात्रों के साथ मिलकर उन्होंने एक विद्यालय गठित किया। जिसकी वजह से 16 साल की उम्र में उन्हें जेल जाना पड़ा।

मोमिन आंदोलन की शुरुआत की थी: अज़हर क़ासमी
अपने संबोधन में मुफ़्ती अब्दुल्लाह अज़हर क़ासमी ने कहा कि अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन में उन्होंने सक्रिय रूप से भाग लिया। गांधी जी के आह्वान पर बिहार राज्य से असहयोग आंदोलन का नेतृत्व की। अब्दुल कयूम अंसारी ने साइमन कमीशन के भारत आगमन पर जमकर विरोध किया।
उन्होंने मोमिन आन्दोलन की शुरुआत की। वो पहले मुस्लिम नेता थे जिन्होंने मुस्लिम लीग की अलगाववादी नीतियों व पाकिस्तान की मांग का जमकर विरोध किया था।