द फॉलोअप डेस्क:
National News: दिल्ली के जंतर-मंतर (Jantar-Mantar) पर शनिवार को भारी सुरक्षा व्यवस्था देखने को मिली। भारत-तिब्बत (India-Tibet) सीमा पुलिस (ITBP) के जवानों ने फ्लैग मार्च किया। इस दौरान सायरन (Siren) बजने और सुरक्षा बलों की कदमताल करते हुए आगे बढ़ने के दृश्य सामने आए। सुरक्षा व्यवस्था के इन दृश्यों को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए गए। कुछ यूजर्स ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों के साथ आतंकवादियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है।

नागरिकों को आतंकवादी मानने का सवाल
एक यूजर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सवाल उठाया कि क्या सरकार उन भारतीय नागरिकों को आतंकवादी मान रही है, जो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं? इस पोस्ट के साथ साझा किए गए वीडियो में सुरक्षा बलों की मौजूदगी और सायरन की आवाज सुनाई दे रही थी।
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विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर विवाद
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन मुख्य रूप से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर हो रहे हैं। आलोचकों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। विपक्षी दल, छात्र संगठन और नागरिक समूह ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने और चुनावी व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं।
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पिछले दिनों भी हुए थे प्रदर्शन और हिरासत
पिछले कुछ दिनों से जंतर-मंतर पर इस मुद्दे को लेकर कई प्रदर्शन हो चुके हैं। पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई। कुछ संगठनों ने पहले भी ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया था और बड़े आंदोलन की चेतावनी दी थी।
सुरक्षा व्यवस्था और लोकतांत्रिक अधिकारों का सवाल
जंतर-मंतर पर भारी सुरक्षा बलों की तैनाती को लेकर कई लोगों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने वाले नागरिकों के खिलाफ इस तरह की सुरक्षा व्यवस्था लोकतांत्रिक अधिकारों पर सवाल खड़े करती है। वहीं, प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती की जाती है। यह घटनाक्रम चुनावी सुधारों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर जारी विवाद का हिस्सा है। इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।