द फॉलोअप डेस्क, रांची:
Jharkhand News: ड्यूशन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (DMD) नाम की दुर्लभ अनुवांशिक बीमारी (Rare genetic disease) से पीड़ित 14 साल के जीत रक्षित (Jeet Rakshit) के बेहतर इलाज की उम्मीद जगी है। द फॉलोअप (The Follow up) में प्रसारित खबर पर खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (CM Hemant Soren) ने संज्ञान लिया है। उन्होंने साहिबगंज के उपायुक्त (Sahebganj DC) को इस केस का संज्ञान लेकर जीत के इलाज की पूरी सुविधा मुहैया कराने का निर्देश दिया है। सीएम ने उपायुक्त को यह भी निर्देश दिया है कि इलाज की समुचित व्यवस्था करके उन्हें सूचित किया जाये।
.@dc_sahibganj अविलंब संज्ञान लें, एवं इलाज की पूरी सुविधा मुहैया कराते हुए सूचना दें।
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) October 28, 2026
7 साल से दुर्लभ बीमारी से पीड़ित हैं जीत
गौरतलब है कि जीत रक्षित की दुर्लभ बीमारी से संबंधित खबर 27 अक्टूबर को द फॉलोअप में प्रसारित हुई थी। जीत रक्षित, साहिबगंज जिला के बोरियो प्रखंड अंतर्गत बोरियो बाजार के बंगाली टोला के रहने वाले हैं। इस बीमारी की वजह से जीत की मांसपेशियां कमजोर हो रही है और वह अपनी दिनचर्या के लिए भी पूरी तरह से पिता मुन्ना रक्षित पर निर्भर हैं। जीत रक्षित पिछले 7 साल से असहनीय पीड़ा से गुजर रहे हैं। इलाज में लाखों का खर्चा है। हालांकि, अब सीएम हेमंत के व्यक्तिगत तौर पर संज्ञान लेने के बाद जीत के बेहतर इलाज की उम्मीद जगी है।

वर्ष 2020 में इस बीमारी का पता चला था
15 मई 2013 को जन्में जीत रक्षित में इस दुर्लभ अनुवांशिक बीमारी का पता वर्ष 2020 में चला। दरअसल, जीत को अचानक चलने-फिरने में तकलीफ होने लगी थी। वह घुटनों को हाथ से पकड़कर चलते थे। सामान्य सी सीढियां भी नहीं चढ़ पाते थे। धीरे-धीरे शरीर के विभिन्न बाह्य अंगों ने काम करना कम कर दिया। पैर निष्क्रिय होते चले गए। अभी जीत की दुनिया एक कमरे में सिमट गई है। प्रारंभिक इलाज दुमका में हुआ है। इसके बाद पिता मुन्ना रक्षित जीत को रांची के मेडिका और रिम्स अस्पताल ले गये। आसनसोल में डॉ. बी रॉय से इलाज करवाया लेकिन इलाज का खर्चा ज्यादा है।
यदि, जीत को मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना या केंद्र के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की राष्ट्रीय दुर्लभ बीमारी नीति का लाभ मिल जाए तो बड़ी राहत होगी।