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लाल-जवाहर-4: तब आज़ाद नगर होता इस्पात नगरी भिलाई का नाम, जानिए नेहरू का क्या था नज़रिया

मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कैलाश नाथ काटजू (जस्टिस मार्कंडेय काटजू के दादा) इस मुहिम का नेतृत्व कर रहे थे

क्या सच ही समुद्र से धरती सबसे पहले झारखंड में ही निकली थी, जानिये इसके राज़

'सिंहभूम में सबसे पहले समुद्र से निकली थी धरती और सबसे पहले सुनामी भी आया था।

लाल-जवाहर-3: नेहरू के पास था देश और नागरिकों के सम्पूर्ण विकास का दूरगामी विज़न

'नेहरू को सजदा करने की चाहत हर सच्चे मां भारती के सपूत के दिल में पैदा होती है।

समाजवादी-ललक-5: लोहिया और गांधी के वैचारिक रिश्ते के मायने

गांधी और मार्क्स के पास सीखने के लिये बहुमूल्य धरोहर है, किन्तु सीखा तभी जा सकता है जब सीख का ढांचा किसी एक युग, एक व्यक्ति से नहीं पनपा हो।

लाल-जवाहर-2: मातृभूमि के लिए अपने समस्त सुख साम्राज्य को स्वाहा करने वाले

'पंडित जवाहर लाल नेहरू, डॉ जंग बहादुर पाण्डेय, हिंदी विभाग राँची विश्वविद्यालय, राँची, 

लाल-जवाहर-1: जानिये आखिर नेहरू के बारे में अटल बिहारी वाजपेयी ने क्या कहा था

''''अटल बिहारी वाजपेयी का 29 मई, 1964 को संसद में दिया गया भाषण

समाजवादी-ललक-4: यूसुफ मेहर अली मज़ाक़ में लोहिया को कहते थे बंजारा समाजवादी

'जयप्रकाश, अशोक मेहता, अच्युत पटवर्धन, नरेन्द्र देव, यूसुफ मेहर अली आदि के साथ लोहिया ने समाजवादी आंदोलन की स्थापना की।

मुक्तिबोध-2 : पत्रकार पुत्र याद कर रहे कवि पिता के पत्रकारिता के दिन

'विविधता से भरे लेखन में से जो रचनावली में फिलहाल संकलित नहीं है। यह चयन आपको ठीक लगे।

मुक्तिबोध-1 अभिव्यक्ति के सारे ख़तरे उठाने ही होंगे,  तोड़ने होंगे ही मठ और गढ़ सब

'वर्तमान हिंदी कविता मुक्तिबोध के काव्य -शिल्प का चाहे जितना निर्वहन और विकास कर ले, उनकी चेतना का निर्वहन और विकास आज भी संभव नहीं हो सका है।

पास-पड़ोस: माओ की लकीर को छोटी करने की क़वायद में जुटे हुए हैं शी चिनफिंग

दो दिन पहले 11 नवंबर को पेइचिंग में 19वीं सीपीसी सेंट्रल कमेटी की बैठक समाप्त हुई।

समाजवादी-ललक-3: संघर्षधर्मी जनचेतना के सबसे जानदार सिपहसालार यानी डॉ. राममनोहर लोहिया

'अब धुर समाजवादी लीडर डॉ राममनोहर लोहिया के बारे में गांधीवादी वरिष्ठ लेखक कनक तिवारी की क़लम से नियमित आपको पढ़ना मयस्सर होगा। आज पढ़िये पहली क़िस्त

भूले-बिसरे: इस मशहूर फिल्मी जोड़ी को कहा जाता था 'भारतीय लॉरेल-हार्डी'

गोरी और दीक्षित एक कॉमेडी जोड़ी थी। वे 1930 और 1940 के दशक के दौरान भारतीय सिनेमा में सक्रिय थे।

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