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नरेंद्र मोदी का आज बिहार दौरा, बदल सकता है सिवान से शाहाबाद तक चुनावी सियासत का माहौल

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व्यंकटेश पांडेय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर बिहार दौरे पर हैं। राज्य में विधानसभा का चुनाव करीब है, तो वो आएंगे ही। सिवान के दौरे पर आए नरेंद्र मोदी, बिहार के लोगों को 'वंदे भारत' समेत कई योजनाओं को हाथ खोल कर लुटा रहे हैं। ताकि अपनी झोली में ज्यादा से ज्यादा वोट भरे जा सकें। क्योंकि कुल मामला लोगों को रिझाने और अपनी तरफ खिचने का ही तो है। इससे पहले वो शाहाबाद क्षेत्र में आए थे, जो इन दिनों बिहार की सियासत में हॉट कॉकटेल बना हुआ है। बीते दिनों आरा (शाहाबाद) में चिराग पासवान ने भी एक जनसभा की थी, जहां उन्होंने तमाम प्रश्नवाचक चिन्हों पर पूर्ण विराम ये कहते हुए लगा दिया कि 'मैं विधानसभा चुनाव लड़ुंगा।

अपने सिवान दौरे के सहारे प्रधानमंत्री मोदी एक साथ कई निशाना साधा। क्योंकि सिवान के अगर भौगोलिक परिदृश्य को समझें तो एक तरफ गोपालगंज लगा है, तो वहीं दूसरी तरफ सारण जिला है। ये वो क्षेत्र है, जो लंबे समय तक लालू प्रसाद यादव का गढ़ माना जाता था।

2024 के लोकसभा चुनाव में JDU की विजय लक्ष्मी कुशवाहा को जीत मिली थी, यानी कि ये सीट NDA के खाते में गई थी। लेकिन 2020 में हुए विधानसभा के चुनाव में यहां की 6 सीटों में से महज एक सीट ही NDA के पाले में आई थी, बाकी सभी सीटों पर महागठबंधन ने बाजी मारी थी। जिसने NDA को गहरा घाव दिया था। तो इस लिहाज से 2025 के विधानसभा चुनाव में पुराने जख्म को भरने की कोशिश है।

पिछले महीने के आखिर में प्रधानमंत्री शाहाबाद क्षेत्र में आए थे और उन्होंने बिक्रमगंज का दौरा किया था, यहां से बिहार को कई योजनाओं की सौगात भी दी थी। बीते साल यानी 2024 के लोकसभा चुनाव में बिहार में NDA ने बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन  इस गठबंधन को शाहाबाद की सभी चार सीटों पर करारी हार मिली और महागठबंधन में शामिल पार्टियां यहां अपना परचम लहराने में कामयाब रहीं।  यहीं कि काराकाट सीटे से चुनाव लड़ने वाले राष्ट्रीय लोक समता पार्टी उपेन्द्र कुशवाहा ने हार के बाद कहा था कि अपने ही लोगों ने मुझे चुनाव हरा दिया। दरअसल उस सीट से पवन सिंह ने निर्दलीय चुनाव लड़ा था, जिसका बहुत हद तक असर देखने को भी मिला था। आरा से चुनाव हारने के कुछ समय बाद आर। के। सिंह का भी कुछ ऐसा ही बयान सामने आया था।

इस क्षेत्र में 22 विधानसभा की सीटें हैं। राजनीतिक रूप से भी बिहार के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि केवल NDA के नेता ही नहीं बल्कि कांग्रस अध्यक्ष ने भी अपनी जनसभा को करने के लिए इसी इलाके को चुना था। हालांकि कुर्सियां खाली रहीं, लोग नहीं जुटे और मल्लिकार्जुन खड़गे सभा बिल्कुल फीकी पड़ गई थी।

2020 के विधानसभा चुनाव के जब नतीजे आए थे, तब NDA को शाहाबाद की 22 सीटों में से केवल दो सीटों पर ही जीत मिली थी और दोनों सीटें बीजेपी के ही खाते में गई थी। बीजेपी आरा और बड़हरा की सीट जीतने में कामयाब रही थी। आरा से अमरेंद्र प्रताप सिंह ने और बड़हरा से राघवेंद्र प्रताप सिंह ने जीत हासिल की थी। 

यानी कुल मिलाकार बात यह है कि प्रधानमंत्री पिछले 3 सप्ताह के अपने दौरे में लगभग दो दर्जन से अधिक विधानसभा सीटों पर अपनी साख मजबूत करने की कोशिश की है। अगर इन सीटों पर NDA या बीजेपी का प्रदर्शन अच्छा रहा, तो चुनाव के नतीजे के बाद बिहार की सियासत में फाल्गुन से पहले ही एक नया रंग देखने को मिल सकता है, तो इंतजार कीजिए। 
Narendra Modi Bihar visit today the atmosphere of electoral politics will change

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