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सांसद पप्पू यादव ने लोकसभा में उठाए नदियों के प्रदूषण, जल संकट और बाढ़ प्रबंधन के गंभीर मुद्दे

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द फॉलोअप डेस्क    
पूर्णिया के निर्दलीय सांसद और कांग्रेस नेता राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने लोकसभा में देश की नदियों के प्रदूषण, जल संकट और बाढ़ प्रबंधन जैसे गंभीर मुद्दों को उठाया है। पप्पू यादव ने नीतीश सरकार की नल-जल योजना की खामियों को उजागर करते हुए कहा कि इस योजना के तहत पूर्णिया, कोसी और मधेपुरा के लगभग 90 प्रतिशत गरीब घरों तक पानी नहीं पहुंचा है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस पर तुरंत कार्रवाई की जाए और ठेकेदारों द्वारा किए गए काम की जांच की जाए। उनका मानना है कि यह जांच जेपीसी के माध्यम से होनी चाहिए।इन योजनाओं पर भी उठाए सवाल
बता दें कि सांसद ने महानंदा बेसिन परियोजना और कोसी मेची लिंक परियोजना के बारे में भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महानंदा बेसिन परियोजना को गलत तरीके से लागू किया गया है। इससे अगर बड़ा बांध बन गया तो महिनहारी, बारसोई, बायसी, अमौर और रौटा के दस लाख किसान बर्बाद हो सकते हैं। वहीं, कोसी मेची लिंक परियोजना में सिल्टिंग निकालने और पक्कीकरण की आवश्यकता है।

नदियों के प्रदूषण पर जताई चिंता
इसके साथ ही पप्पू यादव ने लोकसभा में नदियों के प्रदूषण पर भी चिंता जताते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि हमें नदियों को भगवान मानने के बजाय उन्हें स्वच्छ और जीवनदायिनी बनाने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिन देशों ने नदियों को भगवान नहीं माना, वहां नदियां साफ-सुथरी और जीवनदायिनी बनी रहीं। जबकि हमारे देश में नदियां प्रदूषित हो गई हैं। उन्होंने गंगा, यमुना, कोसी, महानंदा, गंडक, बूढ़ी गंडक, सप्तकोशी, मेची और सोन जैसी प्रमुख नदियों की स्थिति पर भी गहरी चिंता जताई, जो अब स्नान के लायक भी नहीं हैं।पानी के कारण हो रही 90 प्रतिशत बीमारियां
इसके अलावा सांसद ने आगे कहा कि हमारे देश में 90 प्रतिशत बीमारियां पानी के कारण हो रही हैं। आर्सेनिक और आयरन युक्त पानी जानलेवा साबित हो रहा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि हम पुरानी कब्रों को खोदने में तो वक्त नहीं गंवाते, लेकिन स्वच्छ पानी और स्वच्छता के मुद्दे पर क्यों नहीं ध्यान देते। पप्पू यादव ने बाढ़ प्रबंधन की खामियों पर भी चिंता जताई और कहा कि बाढ़ प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि मानव निर्मित आपदा है। उन्होंने बताया कि कोसी क्षेत्र में 13 नदियां हैं, लेकिन उनका उचित प्रबंधन नहीं किया जा रहा है। फरक्का और भीम नगर बैराज की स्थिति भी बहुत चिंताजनक है। नेपाल द्वारा छोड़े गए पानी से कोसी और सीमांचल के लोग खतरे में हैं। इसके अलावा 80 प्रतिशत नदियों और नहरों का पक्कीकरण नहीं हुआ है, जो बाढ़ की समस्या को बढ़ा रहा है।

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