द फॉलोअप डेस्क
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बांका में फर्जी शिक्षकों के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है। उसके हाथ एक और फर्जी शिक्षक लगा है। इस मामले में उसके खिलाफ बाराहाट थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है। प्राथमिक विद्यालय भूरना में तैनात शिक्षिका कमला देवी, पिता नकुल हरिजन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। कमला देवी भूरना पंचायत में 2006 में ही पंचायत शिक्षिका बनी हैं। उन्होंने शैक्षणिक प्रमाण पत्र में हिंदी विद्यापीठ, देवघर की डिग्री दी है। हिंदी विद्यापीठ, देवघर ने उन्हें यह डिग्री 22 मार्च 2004 को जारी की है। इसके अंक पत्र में कमला देवी ने 491 अंक प्राप्त कर प्रथम श्रेणी से साहित्य भूषण की डिग्री प्राप्त की है, लेकिन निगरानी जांच में हिंदी विद्यापीठ ने ही उनके अंक पत्र में छेड़छाड़ पाया है।
वास्तव में वह दूसरी श्रेणी से साहित्य भूषण पास हुई थीं। यानी शिक्षक बहाली में पक्की नौकरी पाने के लिए उन्होंने डिग्री में छेड़छाड़ कर अंक को काफी बढ़ा दिया और द्वितीय श्रेणी को प्रथम बना दिया। इस आधार पर उनकी बहाली हो गई, लेकिन जांच में अंक पत्र में छेड़छाड़ मिलने पर निगरानी ने उनके खिलाफ बाराहाट थाना में केस दर्ज कराया है। शिक्षिका पिछले 20 साल से नौकरी कर गांव में लोगों की आंखों में धूल झोंक रही हैं। केस दर्ज होने के बाद भी वह लगातार स्कूल पहुंच रही हैं। उनके खिलाफ केस दर्ज होने पर शिक्षकों में हड़कंप मच गया है। डीपीओ स्थापना संजय कुमार यादव ने बताया कि निगरानी ब्यूरो के इंस्पेक्टर ने भूरना की शिक्षिका कमला देवी के खिलाफ केस दर्ज करने की सूचना उन्हें दी है। विभाग शिक्षिका की सेवा समाप्ति और बर्खास्तगी के लिए आगे कानूनी कार्रवाई करेगा। मालूम हो कि निगरानी ब्यूरो ने पिछले दो सप्ताह के दौरान बांका में दर्जन भर शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
आगे भी दर्जन भर शिक्षकों की जांच प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंची हुई है। रजौन के उच्च विद्यालय अमहरा कोतवाली के पूर्व प्रभारी प्रधानाध्यापक विद्यानंद सिंह के खिलाफ शिक्षा विभाग प्राथमिकी दर्ज करने की तैयारी कर रहा है। वे निलंबन के बाद भी विद्यालय के नए प्रभारी को प्रभार नहीं सौंप रहे हैं। इससे विद्यालय का संचालन मुश्किल हो रहा है। अब डीईओ ने नए प्रभारी को स्वतः प्रभार का पत्र जारी कर दिया है। पूर्व प्रभारी विद्यानंद सिंह पर विद्यालय की राशि गबन करने के आरोप में केस दर्ज कराया जाएगा। बताया जा रहा है कि वे पिछले आठ-दस सालों से विद्यालय की सारी राशि अपने पॉकेट में रख रहे थे। विद्यालय आय-व्यय का कोई हिसाब उपलब्ध नहीं है, न ही कोई राशि विद्यालय के कोष में जमा की गई है।