पटना
बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने पथ निर्माण विभाग छोड़ने से पहले एक महत्वपूर्ण कदम उठाया, जिससे राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। उन्होंने अगुवानी घाट-सुल्तानगंज गंगा पुल गिरने के मामले में ठेकेदार एसपी सिंगला कंपनी को दोषी पाते हुए, इस कंपनी को बिहार के सभी कार्यों से प्रतिबंधित करने का आदेश दिया। साथ ही, भुगतान पर रोक के बावजूद बिल पास करने वाले संबंधित इंजीनियरों पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए। फर्स्ट बिहार में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, एसपी सिंगला कंपनी गंगा नदी पर खगड़िया के अगुवानी घाट से भागलपुर के सुल्तानगंज तक पुल का निर्माण कर रही थी, जो निर्माण के दौरान तीन बार ढह गया था। इन घटनाओं से राज्य की छवि धूमिल हुई थी, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने कंपनी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की थी। विभागीय सूत्रों के अनुसार, एसपी सिंगला के पास बिहार में लगभग 5,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स हैं, और उसे काम देने में कथित अनियमितताओं की चर्चाएं आम हैं।

विभाग छोड़ने से पहले, विजय कुमार सिन्हा ने एसपी सिंगला के खिलाफ कार्रवाई की अंतिम फाइल पर हस्ताक्षर किए थे। उन्होंने बताया कि विभाग में फाइल ढूंढ़ने में अड़चनें आ रही थीं, लेकिन उन्होंने फाइल निकलवाकर कार्रवाई सुनिश्चित की। अब चर्चा है कि एसपी सिंगला को बचाने के लिए रणनीतियाँ बनाई जा रही हैं, जिससे सरकार चलाने वाले बड़े अधिकारियों और नेताओं में बेचैनी है।
इस घटनाक्रम के बाद, विजय कुमार सिन्हा से पथ निर्माण विभाग का प्रभार वापस ले लिया गया, जिससे यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी सख्त कार्रवाई के कारण ही उन्हें विभाग से हटाया गया। यह मामला बिहार में प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जहां एक वरिष्ठ मंत्री ने प्रभावशाली ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की, लेकिन इसके तुरंत बाद उन्हें विभाग से हटा दिया गया।
