राजनीति में विरोध विचारों का होना चाहिए, शब्दों का नहीं। लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन मतभेद व्यक्त करने के लिए भाषा की मर्यादा को भूल जाना किसी भी जनप्रतिनिधि के लिए उचित नहीं हो सकता। राजनीतिज्ञों के शब्द केवल उनके व्यक्तिगत विचारों क