जूनियर इंजीनियर की 70% नौकरियां दूसरे राज्यों के उम्मीदवार को दी गयीं। अमर बाउरी ने इस प्रतिशित पर कहा कि राज्य सरकार को इसका करारा जवाब राज्य का ही युवा वर्ग देगा।
झारखंड में दूसरे राज्यों के लोगों की नियुक्तियों पर आजसू ने की आपत्ति जाहिर की है औऱ कहा कि राज्य में नई नियोजन नीति जल्द बनाई जाये।
JSSC द्वारा निम्न वर्गीय लिपिक के पद पर नियुक्ति के लिए अनुशंसित 676 सफल आवेदकों में से 116 युवकों को अब तक नियुक्ति पत्र नहीं मिला है। इसके पीछे की वजह बताई जा रही है कि संबंधित जिलों में अनुशंसाओं के आलोक में रिक्त पद नहीं है।
सूत्रों के हवाले से मिल रही ताजा जानकारी के मुताबिक, आशा लकड़ा राज्यसभा की दौड़ से बाहर हो गई हैं। हालांकि, बीजेपी उनको केंद्रीय दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री बनाने पर विचार कर रही है।
अपने छोटे से कार्यकाल में ही ट्रांसफर और पोस्टिंग का जो खेल मुख्यमंत्री चंपाई कर रहे हैं, उससे अधिकारी त्राहिमाम हो चुके हैं। ऐसा लग रहा है कि मुख्यमंत्री ट्रांसफर और पोस्टिंग को एक उद्योग की तरह समझ रहे हैं।
कुछ मीडिया रपट्स के मुताबिक रामगढ़ के रजरप्पा में इन दिनों मुस्लिम युवाओं का एक संगठन आदम सेना सक्रिय है। इसके खिलाफ कार्रवाई के लिए झारखंड बीजेपी के अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने सीएम चंपाई को कहा है।
कौशल कुमार नामक एक व्यक्ति ने 4 मार्च को पंडरा ओपी में शिकायत दर्ज करवरकर यह बताया था कि ओझा मार्केट स्थित उसके बर्तन दुकान में करकट काट कर अज्ञात चोरों द्वारा लगभग डेढ़ लाख रुपए का बर्तन चोरी कर लिया है।
आचार्य पति अपनी पत्नी पर दोस्तों से संबंध बनाने के लिए दबाव डालता था। साथ ही संतान प्राप्ति के लिए पत्नी से हवन करवाता था।
सुप्रीम कोर्ट ने आप पार्टी को राउज एवेन्यू में बने दफ्तर को खाली करने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए पार्टी को 15 जून तक का समय दिया है।
समाजसेवी जितेंद्र सिंह पिछले दिनों आजसू पार्टी में शामिल हो गये। अरगोड़ा मैदान में आयोजित भव्य मिलन समारोह में पार्टी सुप्रीमो सुदेश महतो ने उनका स्वागत किया। आजसू पार्टी में शामिल होने के बाद से ही जितेंद्र सिंह इलाके में काफी एक्टिव हैं।
अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बिगड़ते शैक्षणिक वातावरण को लेकर चिंता जताई है।
झारखंड में आंगनबाड़ी चलो अभियान की शुरुआत होगी। इसके तहत स्कूल जाने से पहले बच्चों को शिक्षा दी जाएगी। तीन से चार वर्ष के बच्चों के लिए नवकदम, चार से पांच साल के बच्चों को शिशु कदम और पांच से छह साल के बच्चों को बाल कदम से जाना जाएगा।