logo

पंतजलि का दावा झूठा! WHO ने कहा कोविड की दवा के लिए नहीं दिया सर्टिफिकेट

5462news.jpg

द फॉलोअप टीम, दिल्‍ली:

विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण पूर्व एशिया के क्षेत्रीय मुख्यालय ने एक ट्वीट के जरिये बाबा रामदेव के इस दावे को निराधार बताया है कि पंतजलि आयुर्वेद की दवा कोरोनिल को डब्ल्यूएचओ ने मैनुफैक्चरिंग गुड प्रैक्टिस (एमजीपी) का सर्टिफिकेट दिया है। अपने ट्वीट में डब्ल्यूएचो (साउथ ईस्ट एशिया) ने कहा कि हमने कोविड-19 के इलाज के लिए किसी भी ट्रेडिशनल मेडिसीन को सर्टिफिकेट नहीं दिया है। 
कोरोनिल का रिलांच विवादों में घिरा
दरअसल, बीते 19 फरवरी को पंतजलि आयुर्वेद ने एक प्रेस कांफ्रेंस किया था। जिसमें पंतजलि आयुर्वेद ने कोरोनिल दवा को रिलांच किया। मौके पर पंतजलि आयुर्वेद के मैनेजिंग डायरेक्टर आचार्य बालकृष्णन, बाबा रामदेव, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी उपस्थित थे। लांचिंग के मौके पर बाबा रामदेव ने दावा किया कि उनकी कंपनी द्वारा निर्मित कोरोनिल को विश्व स्वास्थ्य संगठन के मैनुफैक्चरिंग गुड प्रैक्टिस सर्टिफिकेशन के आधार पर ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीडीए) ने फार्मास्युटिकल प्रोडक्ट सर्टिफिकेट दिया है।

 

आचार्य बालाकृष्णन ने भी किया दावा
यही दावा पतंजलि आयुर्वेद के मैनेजिंग डायरेक्टर आचार्य बालकृष्णन ने भी किया। अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल पर उन्होंने लिखा, " हमें ये बताते हुए अपार हर्ष एवं गर्व है कि कोरोनिल को डब्ल्यूएचओ जीएमपी के गुणवत्ता अनुमोदन के अनुरूप डीसीजीए द्वारा सीओपीपी लाइसेंस दिया गया। मौके पर बाबा रामदेव ने एक रिसर्च बुक भी पेश किया और कहा कि अब कोरोनिल को लेकर शंका की कोई बात नहीं। लेकिन, कुछ ही समय बाद डब्ल्यूएचओ के दक्षिण पूर्व एशिया के क्षेत्रीय मुख्यालय ने इसका खंडन किया। कहा कि उन्होंने ऐसी किसी भी दवा को सर्टिफाइ नहीं किया है। 

पंतजलि आयुर्वेद की दावे पर सफाई
पंतजलि के दावे को जब डब्ल्यूएचओ ने खारिज कर दिया तो आचार्य बालकृष्णन ने इस पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य केवल लोगों का कन्फ्यूजन दूर करना था। मैं साफ कर देना चाहता हूं कि विश्व स्वास्थ्य सगंठन किसी भी दवा को मंजूर या नामंजूर नहीं करता है। दिलचस्प है कि केंद्रीय मंत्रियों  और आध्यात्मिक गुरू पंडित रविशंकर ने भी इस दवा के समर्थन में ट्वीट किया था। 



कोरोनिल कोविड इलाज की दवा नहीं!
आपको बता दें कि कोरोना महामारी के बीच 23 जून 2020 को पंतजलि आयुर्वेद ने कोरोनिल कीट नाम से दवा लॉंच की थी। कंपनी ने दावा किया था कि ये दवा कोरोना के इलाज के लिए बनाई गई है। हालांकि इसकी प्रमाणिकता को लेकर सवाल उठे। काफी हंगामा भी हुआ। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने कहा कि पंतजलि आयुर्वेद इसे केवल रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवा बताकर बेच सकती है। यहां तक की उत्तराखंड सरकार के आयुष मंत्रालय ने भी पंतजलि को नोटिस जारी किया था।