logo

जानिये मिले सुर मेरा तुम्‍हारा ...के पर्दे पर आने और समूची दुनिया में गूंज जाने की कहानी

12136news.jpg

मनोहर महाजन, मुंबई:  

कौन सा 'संगीतप्रेमी' या 'देशप्रेमी' ऐसा होगा जिसने "मिले सुर मेरा तुम्हारा" न सुना हो। जिसे पंडित भीमसेन जोशी, एम. बालमुरलीकृष्ण, लता मंगेशकर, सुचित्रा मित्रा ,कविता कृष्णमूर्ति समेत कई नामचीन गायकों ने अपने स्‍वरों से सजाया था। शब्‍द पीयूष पांडे के रचित थे। इसी गीत के कम्पोज़र अशोक पतकी की आज 80वीं सालगिरह है। चलिये इस गीत के बनने की 'पृष्ठभूमि' के बारे में जानते हैं। रेडियो सीलोन का कार्यकाल पूरा कर जब मैंने मुम्बई में बतौर 'फ्रीलान्सर' अपने करियर की शुरुआत की तो मुझे संगीतकार सुरेश तलवार वाले संगीतकार स्व. सुरेश शाह और अशोक पतकी के साथ काम करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उस दौर के मेरे प्रोग्रामों के ज़्यादतर 'जिंगल्स' और 'सिग्नेचर ट्यून्स' इन्होंने ही कम्पोज़ किये थे। सुरेश भाई तो अब इस दुनिया मे नहीं है, पर अशोक पतकी का वरद हाथ अब भी मेरे सर पर है। 5000 से अधिक जिंगल्स की रचना कर चुके अशोक पतकी आज बहुत ऊंचा मुक़ाम हासिल कर चुके हैं। विशेषतः मराठी सिनेमा, थिएटर और टेलीविजन में। कोंकणी फिल्म 'अंतरनाद' के लिए 54वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों (2006) में 'सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं।

 

अशोक पतकी के कंपोज़ किये गए इस छह मिनट के लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी गीत के 'अरेंजर' थे लुईस बैंक्स और इसके बोल बोल लिखे थे। पीयूष पांडे ने यह गीत असमिया, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी, सिंधी, तमिल, तेलुगु और उर्दू में  उस दौर के 'टॉपमोस्ट' और 'मेरे फ़ेवरेट' रिकॉर्डिंग स्टूडियो 'वेस्टर्न आउटडोर' में रिकॉर्ड हुआ था और रिकार्डिस्ट थे दमन सूद और सहयोगी अविनाश ओक। हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के अग्रदूत पंडित भीमसेन जोशी की विशिष्ट, उत्साही और सुखदायक आवाज़ की अगुआई में गायक और संगीतकार एम बालमुरलीकृष्ण, लता मंगेशकर, सुचित्रा मित्रा और कविता कृष्णमूर्ति की सुरीली आवाज़ों के परवाज़ लेते इस गीत में -अभिनेता कमल हासन, अमिताभ बच्चन, मिथुन चक्रवर्ती, जीतेंद्र, वहीदा रहमान, हेमा मालिनी, तनुजा, शर्मिला टैगोर और शबाना आज़मी सहित सभी मुख्य धाराओं की प्रसिद्ध हस्तियां शामिल थीं। नर्तकी मल्लिका साराभाई; कार्टूनिस्ट मारियो मिरांडा, फिल्म निर्माता मृणाल सेन; लेखक सुनील गंगोपाध्याय और अन्नदा शंकर रे; खिलाड़ी नरेंद्र; हिरवानी,एस. वेंकटराघवन, प्रकाश पादुकोण, रामनाथन कृष्णन और कई अन्य भी इसमें शामिल थे।

 

विज्ञान एजेंसी 'ओगिल्वि &माथर' द्वारा पुराने ज़माने के हिन्दी फिल्मों के मशहूर अभिनेता सुरेंद्रनाथन के सुपुत्र उस दौर के 'टॉप एड-फिल्म मेकर' कैलाश सुरेंद्रनाथ को इस गीत को निष्पादित करने का कठिन काम सौंपा गया जो 'लिरिल' और 'वाह ताज' जैसे प्रतिष्ठित विज्ञापन  फिल्में बना चुके थे.कैलाश सुरेंद्रनाथ ने देश भर में यात्रा कर अनेकानेक व्यक्तित्वों, परिदृश्‍यों और आम लोगों को फिल्माया। इसे बनाने में छह महीने लगे थे। वर्ष 1988 भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने लाल किले की प्राचीर से अपना स्वतंत्रता दिवस भाषण समाप्त करने के बाद एक गीत का प्रसारण किया गया था, जिसे लाखों भारतीयों ने इसे पहली बार सुना और देखा। भारत की विविध संस्कृतियों और उपलब्धियों के लिए इससे बेहतर विज्ञापन फ़िल्म आज तक मेरी नज़र से नही गुज़री।

(मनोहर महाजन शुरुआती दिनों में जबलपुर में थिएटर से जुड़े रहे। फिर 'सांग्स एन्ड ड्रामा डिवीजन' से होते हुए रेडियो सीलोन में एनाउंसर हो गए और वहाँ कई लोकप्रिय कार्यक्रमों का संचालन करते रहे। रेडियो के स्वर्णिम दिनों में आप अपने समकालीन अमीन सयानी की तरह ही लोकप्रिय रहे और उनके साथ भी कई प्रस्तुतियां दीं।)

नोट: यह लेखक के निजी विचार हैं। द फॉलोअप का सहमत होना जरूरी नहीं। हम असहमति के साहस और सहमति के विवेक का भी सम्मान करते हैं।