logo

सरकारी शिक्षकों के बच्चों का गर्वमेंट स्कूल में पढ़ना हो अनिवार्य, अध्यादेश लाए हेमंत सरकार: पासवा

12790news.jpg

द फॉलोअप टीम, रांची

प्राइवेट स्कूल एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन, पासवा ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि राज्य सरकार एक अध्यादेश लाये, जिसमें सरकारी शिक्षकों को अपने बच्चे को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना अनिवार्य होगा एवं शिक्षकों के सेवा शर्तों में भी यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि शिक्षक अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में ही पढ़ायेंगे। साथ-साथ शिक्षक जिस स्कूल में पदस्थापित है, उनके बच्चे उसी स्कूल में पढ़ना चाहिए, जो शिक्षक ऐसा नहीं करते हैं, उन्हें तत्काल बर्खास्त करना चाहिए। शिक्षक अपने बच्चों को खुद सरकारी स्कूल में पढ़ाएंगे, तो आम जनता भी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिला देगी। 

सरकारी स्कूलों में फर्जी काम हो रहे
पासवा के प्रदेश अध्यक्ष आलोक कुमार दूबे ने कहा कि पासवा की ओर से जिलाध्यक्षों और प्रखंड अध्यक्षों के माध्यम से अभिभावकों को जोड़ कर उड़न दस्ता तैयार किया गया है। साथ ही संचार एवं सूचना तकनीक के इस दौर में संगठन के पदाधिकारी सरकारी स्कूलों में जाएंगे और वहीं से वीडियो जारी करेंगे। यह आज कड़वी सच्चाई बन चुकी है कि प्राइवेट स्कूल बच्चों को पढ़ाते है, जबकि सरकारी स्कूलों में फर्जी काम हो रहे हैं। दाल-भात पकाओ, खाओ, दस-दस, बीस-बीस साल से शिक्षक एक ही जगह पर पदस्थापित है और स्कूल भी नहीं जाते हैं। कई प्राचार्यों और शिक्षा के अधिकारियों के खुद के भी प्राइवेट स्कूल हैं, जिसकी सूची जल्द ही जारी की जाएगी। आलोक दूबे ने कहा सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का माहौल नहीं है इस सच्चाई से कोई इंकार नहीं कर सकता जबकि सरकारें चाहे केन्द्र की हो या राज्य की हर सुविधा उपलब्ध कराती है। एक एक शिक्षक की तनख्वाह हजारों और लाखों में होती है।

बड़े अधिकारी सरकारी स्कूल नहीं भेजते
इस मुद्दे पर पासवा के प्रदेश उपाध्यक्ष लाल किशोरनाथ शाहदेव ने कहा कि बगल के राज्य बिहार में उच्च न्यायालय ने सरकार से जानकारी मांगी है कि बड़े अधिकारी और सरकारी मुलाजिमों के कितने बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते है। झारखंड में भी पासवा की ओर से जनहित याचिका दायर कर जानकारी मांगी जाएगी। प्राइवेट स्कूल के खिलाफ नेतागिरी करने वाले और बयानबाजी करने वाले लोगों को अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिला कराना चाहिए, फिर प्राइवेट स्कूलों के बोले, अन्यथा उन्हें प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। 

सरकारी स्कूल पर नजर रखें पेरेंट्स
पासवा के प्रदेश महासचिव डॉ0 राजेश गुप्ता छोटू ने कहा कि मुख्यमंत्री से अनुरोध है कि सरकारी स्कूलों पर अरबों रुपये खर्च होते है कि वह जनता के टैक्स का पैसा होता है, लेकिन राज्य में सरकारी स्कूलों की स्थिति क्या है, इस पर सरकार को गंभीरता पूर्वक विचार करने की जरूरत है। 17 महीने पूरे कोरोना काल में सरकारी शिक्षकों ने वेतन लिया और क से कबूतर भी नहीं पढ़ाया। आज जब सच्चाई की बात हो रही है, तो वे तिलमिला रहे हैं। 

सरकारी शिक्षकों की संपत्ति की जांच
पासवा आम जनता से भी अनुरोध करती है कि सरकारी स्कूलों पर नजर रखें और पता करें कि कितने बच्चे स्कूल आते हैं, पढ़ाई होती है और मिड डे मिल की क्या स्थिति है। पासवा ने यह भी मांग की है कि उन शिक्षकों की संपत्तियों की भी जांच की जाए, जो पढ़ाते कम और नेतागिरी ज्यादा करते हैं। पासवा ने कहा कि मुख्यमंत्री एनुअल स्टेट्स ऑफ ऐजुकेशन (असर) की उस रिपोर्ट की का भी अध्ययन करें जहां झारखंड के सरकारी स्कूलों के पांचवीं कक्षा के बच्चे दूसरी कक्षा का पाठ पढ़ने में असमर्थ हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आठवीं के 56 फीसदी बच्चों को भाग देने नहीं आता है और कक्षा तीन के 17 फीसदी बच्चों को अक्षर ज्ञान नहीं मालूम है।