द फॉलोअप टीम, गया:
मगध का शेरघाटी जैसा कस्बा और लड़के की उम्र महज 16 साल। लेकिन दर्द से उसका याराना ऐसा रहा कि उसके मरहम के लिए देश के दर्जनों राज्यों का सफर कर डाला। उन बच्चियों का मुत्तिदाता बना, जिनकी कम उम्र में शादियां कर दी जाती रही हैं। इसे बंधुआ विवाह कहने से कोई परहेज नहीं। बचपन में किसी अधेड़ के पल्लू, बांध दी गईं करीब 6000 लड़कियों को यह लड़का मुक्त करा चुका है। नाम है, शफीकुर रहमान खान। जिसकी नेकी की गूंज दिल्ली़ होते हुए वाशिंग्ट न तक जा पहुंची। और दो साल पहले अमेरिका की एक संस्था़ ने उसे सत्तर लाख के ग्रिनेल अवार्ड से नवाजा। जिन गलियों में उसने धींगामुश्ती की, जब युवाओं ने उसका इस्तकबाल शॉल ओढ़ाकर किया, तो उसकी आंखें छलछला आईं।
होप फाउंडेशन ने किया सम्मानित
आमस प्रखंड के बैदा गाँव स्थित गाँधी आजाद पब्लिक स्कूल में होप फाउंडेशन की ओर से शफीकुर रहमान खान को सम्मासनित किया गया। सम्मान समारोह की अध्यक्षता पूर्व वार्ड पार्षद इमरान अली ने की जबकि संचालन स्कूल के संस्थापक मोहम्मद अली ने किया। हमजापुर के अपने सोनी को शॉल, बुके और फूलों की माला पहनाई गई। मुजीबुरर्हमान खान के सुपुत्र शफीक का पुकारु नाम सोनी ही है।
बोले, अभी 10 राज्यों में कर रहे हैं काम
मौके पर शफीक ने बताया कि फिलहाल वह 10 राज्यों हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, असम, पश्चिम बंगाल, झारखण्ड और बिहार आदि में काम कर रहे हैं। अब तक लगभग छह हजार महिलाओं को मुक्त करा चुके हैं। उन्होंने गाँधी आज़ाद पब्लिक स्कूल की प्रशंसा करते हूए कहा कि एक समय मैं भी इस स्कूल का स्टाफ हुआ करता था। यह स्कूल ग्रामीण क्षेत्र का अनोखा स्कूल है. शफीक ने स्कूल कैंपस में वृक्षरोपण भी किया।
ये भी रहे सम्मान समारोह में शरीक
सम्मान समारोह को मुस्कान फाउंडेशन के फाउंडर इमरोज़ अली, ज़ीशान आफरीदी और शाहिद इक़बाल ने भी सम्बोधित किया। बधाई देने वालों में होप फाउंडेशन के अध्यक्ष शौकत अली, कांग्रेसी नेता ज़ीशान आफरीदी, यूनिसेफ़ के बीएमसी शाहिद इक़बाल, नदीम अख्तर, हिफजुर रहमान उर्फ़ रिंकू, जमील अख्तर, ज़ाकिर हुसैन, इश्तेयाक अंसारी, शाहिद शब्बीर, हसनैन हैदर और मोज़फ्फर रजा आदि शामिल हैं।