द फॉलोअप टीम, पटना:
शहाबुद्दीन की मौत के बाद अब उनकी कब्र सुर्खियों में हैं। शाहबुद्दीन के शव को जदीद कब्रिस्तान में दफनाया गया है। परिजनों ने कब्र को यादगार बनाने के उसे मकबरा बनाना चाहा और इसलिए चुपके से पक्की कब्र बनाने के लिए बालू-गिट्टी-सीमेंट-ईंट-सरिया वहां लाकर रख दिया था। जब इसकी भनक जदीद कब्रिस्तान कमेटी को हुई तो कमिटी ने इसका विरोध किया। कब्र के पक्कीकरण पर रोक लगा दी। कमेटी ने कहा जमीन की कमी होने की वजह से पक्की कब्र बनाने की मनाही है।
पक्कीकरण पर रोक
कमेटी का कहना है कि कोविड से हो रही लगातार मौतों की वजह से भी पक्कीकरण पर रोक है। शहाबुद्दीन के परिजनों ने कब्र को मकबरा बनाने के लिए पहुंचे थे। निर्माण कार्य शुरू भी हो गया था। कब्र के चारों तरफ दीवारें बना गई थी लेकिन कब्रिस्तान कमिटी ने इसकी मंजूरी नहीं दी। रोक के बाद भी शहाबुद्दीन के कब्र का पक्कीकरण का काम चलता रहा। काफी हंगामा होता रहा। कब्रिस्तान कमेटी ने काफी रोका। लेकिन, शहाबुद्दीन के परिजन नहीं मानें।
पुलिस ने आकर रोका काम
शहाबुद्दीन के परिवार मानने को तैयार नहीं थे इसलिए पुलिस को बुलाया गया। पुलिस के आने के बाद काफी हंगामा हुआ। बाद में पुलिस ने समझा-बुझाकर काम को रोक दिया गया। 1992 से ही कब्रिस्तान कमेटी ने एक कानून बनाकर जदीद कब्रिस्तान में कब्र को पक्की करने पर रोक लगा दी थी। बता दें कि शहाबुद्दीन कोविड-19 से संक्रमित हो गए। वह दिल्ली के तिहाड़ जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे। 1 मई को शहाबुद्दीन की मौत इलाज के दौरान हो गई थी।