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नीतीश कुमार ने बहुत ही कायदे से आरसीपी सिंह के कतर दिए पर, मंत्री बनना रह गया सपना!

नीतीश कुमार ने बहुत ही कायदे से आरसीपी सिंह के कतर दिए पर, मंत्री बनना रह गया सपना!
शिवानंद तिवारी, पटना:
ललन सिंह और रामचंदर बाबू (सिंह)में सब कुछ ठीक ठाक है न! दरअसल एक अख़बार में छपी ख़बर से मेरे मन में शंका पैदा हुई। ख़बर मोदी मंत्रिमंडल के विस्तार से जुड़ी हुई है। बिहार में कई दिनों से चर्चा है कि इस बार केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार में नीतीश की पार्टी के लोगों को भी जगह मिलने वाली है। यह भी चर्चा है कि नीतीश का दिल्ली दौरा संभवतः इसी सिलसिले में है। लेकिन राम चंद्र बाबू तो उल्हा हो गए। बहुत उड़ रहे थे। नीतीश कुमार ने बहुत ही कायदे से उनके पर कतर दिए। केंद्रीय मंत्रिमंडल में जदयू के शामिल होने के सवाल पर रामचंद्र बाबू के बोलने का अंदाज ऐसा था जैसे नीतीश कुमार की ओर से ही बोल रहे हैं। लेकिन दूसरी ओर नीतीश जब दिल्ली पहुंचे तो पत्रकारों के सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी 'आदरणीय' प्रधानमंत्री जी तय करेंगे. यह उनके ऊपर है। उनसे मुलाकात की कोई बात नहीं है। 'पता नहीं कहां से यह सब चल रहा है'! 

पहले भी मंत्री बनते-बनते रह गए थे
कुछ दिन पहले भी मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा हुई थी! रामचंदर बाबू केंद्रीय मंत्रिमंडल में शपथ लेने वाले हैं, यह लगभग तय माना जा रहा था। उनके आवास पर भक्तों की भीड़ लग गई थी। माला, बुके, मिठाई उठाकर रखने वाले थक गए थे। लेकिन पता नहीं किसने उल्टा वाण चला दिया और रामचंद्र बाबू शपथ लेते लेते रह गए। बहुत मायूसी का वातावरण। केंद्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार होना तय है। चरचा के अनुसार पिछली दफ़ा नीतीश जी की पार्टी को संभवतः प्रतिकात्मक रूप से एक ही जगह मिल रही थी। इसलिए मंत्रीमंडल में शामिल होने के लिए वह तैयार नहीं हुए। संभवतः सांसदों की संख्या के अनुपात में मंत्रियों की संख्या के वे हिमायती थे। बिहार के मंत्रीमंडल में भी सदस्यों की संख्या का आधार उन्होंने यही बनाकर रखा है। 

अखबारी बयान में उलझे ललन और आरसीपी
ख़बरों के अनुसार में नीतीश की दिल्ली यात्रा व्यक्तिगत है।  ललन सिंह भी यही बता रहे हैं। लेकिन दूसरी ओर रामचंद्र बाबू आत्मविश्वास से लबालब, दावा कर रहे थे कि जनता दल यूनाइटेड का मंत्रिमंडल में शामिल होना पक्का है। उनके मुताबिक़ तो संख्या के सवाल पर कोई विवाद नहीं होनेवाला है। अपने अति उत्साह में वे नीतीश जी के पुराने फ़ार्मूले, संख्या के अनुपात में मंत्रिमंडल में जगह को वो अव्यवहारिक तक घोषित कर दिया। लेकिन ललन के बयान की ध्वनि कुछ अलग लग रही है। ललन कह रहे हैं कि ‘मंत्रीमंडल विस्तार और जदयू का उसमें शामिल होना अटकलबाज़ी है।’ रामचंद्र बाबू और ललन दोनों नीतीश जी के खासमखास हैं. एक ही मामले में दोनों के दो स्वर से भ्रम का पैदा होना स्वभाविक है।

अब नीतीश के बयान के बाद रामचंद्र बाबू की स्थिति देखना दिलचस्प 
नीतीश जी ने ऐसे कहा जैसे उनको भनक ही नहीं हो कि यह कहां से चल रहा है ! दरअसल नीतीश कुमार ने राम चंद्र बाबू को शुरू में ढील दी। कहां तक ये उड़ सकते हैं। उसके बाद उनकी औकात बताने के लिए बहुत ही मासूम अंदाज में वह धागा काट दिया जिसके सहारे वे उड़ रहे थे। अब आगे रामचंद्र बाबू की स्थिति क्या रहती है यह देखना दिलचस्प रहेगा। 

मोदी को नीतिश ने पहली बार कहा आदरणीय
इधर, दिल्ली में पत्रकारों के साथ बातचीत में नीतीश जी ने प्रधानमंत्री के नाम के साथ 'आदरणीय' जोड़ा। इसके पहले मैंने उनको आदरणीय प्रधानमंत्री जी कहते नहीं सुना था। याद आ रहा है कि एक जमाना था जब नरेंद्र मोदी से छुआने में नीतीश जी को परहेज था। उनकी नजरों में मोदी जी का व्यक्तित्व विभाजन कारी और अकलियतों के लिए डरावना था। आज जब उनके मुंह से उन्हीं नरेंद्र मोदी जी के नाम के साथ आदरणीय लगाते देखा तो थोड़ी पीड़ा भी हुई। सत्ता के लिए आदमी क्या-क्या कर सकता है यह उसीका एक नमूना है।



(बिहार के भोजपुर में जन्मे लेखक शिवानंद तिवारी देश की लोहियावादी बिरादरी के अहम स्तंभ हैं। सेकुलरिज्म और समाजवादी विचारों के लिए उनकी पहचान है। राजद के उपाध्यक्ष हैं। राज्यसभा सांसद भी रहे।) 

नोट: यह लेखक के निजी विचार हैं। द फॉलोअप का सहमत होना जरूरी नहीं। हम असहमति के साहस और सहमति के विवेक का भी सम्मान करते हैं।