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'बड़की काकी एट हॉट मेल डॉट कॉम' वाले मैथिली-हिंदी के लेखक श्याम दरिहरे का देहावसान

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द फॉलोअप टीम, धनबाद: 
मैथिली एवं हिंदी के जाने-माने साहित्यकार श्याम दरिहरे के मैथिली कथा संग्रह 'बड़की काकी एट हॉट मेल डॉट कॉम' को 2016 का साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था। आज शनिवार तड़के वृंदावन में उन्‍होंने अंतिम सांस ली।  धर्मपत्नी राजकुमारी झा गृहिणी हैं। दो पुत्रों में एक अमेरिका के लॉस एंजिल्स में इंजीनियर और दूसरे भारत में ही आइबीएम कंपनी में इंजीनियर हैं। बेटी भी अमेरिका में नौकरी करती हैं। श्याम दरिहरे के निधन पर धनबाद विद्यापति समिति व सिंदरी विद्यापति परिषद् ने शोक जताया है

जन्‍मभूमि बिहार, कर्मभूमि झारखंड 
दरिहरे का जन्म  बिहार के मधुबनी जिला के बेनीपट्टी प्रखंड अंतर्गत बरहा गांव में 1954 में हुआ था। स्कूली पढ़ाई बिहार में करने के बाद जमशेदपुर में उन्होंने कॉलेज की शिक्षा पाई।  उनका कर्मक्षेत्र भी झारखंड ही रहा।

होमगार्ड में रहे समादेष्टा 
श्याम दरिहरे वर्ष 1987 में बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास कर प्रशासनिक सेवा में आए थे। देवघर, धनबाद, बोकारो, चास, कतरास में  होमगार्ड में समादेष्टा के पद पर रहे। हजारीबाग में डिविजनल कमांडेंट के पद से वर्ष 2014 में सेवानिवृत्त हुए थे।

रिटारयरमेंट के बाद अध्यात्म में रमे
रिटायर होने के बाद अध्यात्म की ओर रम गए थे। ज्यादातर समय वृंदावन में बिताने लगे थे। हालांकि इसी दौरान लेखन छूटानहीं। अध्यात्म और विज्ञान पर केंद्रित घुरी आऊ मान्या और जगत एक सपना जैसे उनके उपन्यास सामने आए। 

उनकी प्रमुख किताबें
उनकी प्रमुख कृतियों में मैथिली कथा संग्रह 'सरिसोमे भूत', मैथिली कविता संग्रह 'क्षमा करब हे महाकवि',  क्षमा करु हे लक्ष्मी, रक्त संबंध, हमर जन्म किया भेलेई हे रामा, हिंदी कविता संग्रह 'गंगा नहाना बाकी है' और धर्मवीर भारती की पुस्तक कनपुरिया का अनुवाद शामिल हैं।