logo

दूसरी सोमवारी कल: जानें पूजा विधि और जलाभिषेक का समय 

11433news.jpg

द फॉलोअप टीम, रांची:

सनातन धर्म में सावन महीने का विशेष महत्त्व होता है। यह महीना देवाधि देव भगवन शंकर को समर्पित होता है। ऐसे में हर भक्त के मन में उत्सुकता रहती है कि हम किसी तरह से भगवान शिव की पूजा करें जिससे वह हमसे प्रसन्न हों। कल सावन की दूसरी सोमवारी है। यहां हम सोमवारी व्रत से जुडी हुई कुछ अहम चीजों की चर्चा करेंगे। सबसे पहले तो जानेंगे कि पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है, हमे कब जलाभिषेक करना है, क्या पहनना है, और पूजा की सामग्री क्या होनी चाहिए। 

 

कब करें जलाभिषेक 

भगवान शिव को जल चढाने का सबसे अच्छा समय सुबह का है। इसमें सूर्योदय से पहले जागें और स्नान के बाद साफ़ कपडे पहनें।  पूजा स्थल को स्वच्छ कर वेदी स्थापित करें।  शिवलिंग पर दूध चढ़ाकर महादेव के व्रत का का संकल्प लें। सुबह-शाम भगवान शिव की प्रार्थना करें।  पूजा के लिए तिल के तेल का दीया जलाएं और भगवान शिव को फूल चढ़ाएं। मंत्रोच्चार करने के बाद शिव को सुपारी, पंच अमृत, नारियल और बेल की पत्तियां चढ़ाएं। व्रत के दौरान सावन व्रत कथा का पाठ जरूर करें।

 

शिव की पसंदीदा वस्तुएं 
महादेव को सावन में धतूरा, बेलपत्र, भांग, इत्र, चंदन, केसर, अक्षत, शक्कर, गंगाजल, शहद, दही, घी, गन्ना और फूल बेहद पसंद है. इसके अलावा शिवजी को आक का लाल-सफेद फूल भी बेहद पसंद है।

 

क्या पहनावा रखें 

श्रद्धालुओं को संभव हो तो सावन में रुद्राक्ष की माला धारण करना चाहिए। सुबह और शाम के अंतिम समय में रुद्राक्ष की माला से ही शिव मंत्र जाप करें। पूजन के समय भगवान शिव को भभूत लगाएं और खुद भी माथे पर इसे लगाएं।  पूजा के दौरान शिव चालीसा और आरती पाठ करें।  इसके अलावा दिन में महामृत्युंजय मंत्र का भी जाप करें। 

भोजन
सावन माह में श्रद्धालुओं को हर समय सात्विक भोजन ही ग्रहण करना चाहिए, खास तौर पर सोमवार को अनाज से बने खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहए। इसके अतिरिक्त लहसुन, प्याज, मांसाहार, मैदा, बेसन, सूजी, मेथी दाना, गरम मसाला आदि भी वर्जित किया गया है।