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हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह ने डॉक्टर्स औऱ स्वास्थ्यकर्मियों को समर्पित किया कांस्य पदक

हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह ने डॉक्टर्स औऱ स्वास्थ्यकर्मियों को समर्पित किया कांस्य पदक

द फॉलोअप टीम, दिल्ली: 

भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने गुरुवार की सुबह इतिहास रच दिया। टोक्यो ओलंपिक्स में कांस्य पदक के लिए हुए मुकाबले में जर्मनी को 5-4 से हरा दिया। पुरुष हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह ने इस जीत को कोरोना महामारी के खिलाफ जंग लड़ रहे डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को समर्पित किया। 4 दशक के सूखे के बाद टोक्यो ओलंपिक्स में मिली जीत के बाद मनप्रीत सिंह के पास कहने को शब्द नहीं थे। 

एक समय 3-1 से पिछड़ रही थी टीम
गौरतलब है कि जर्मनी के खिलाफ कांस्य पदक के लिए हो रहे मुकाबले में एक वक्त पर 3-1 से पिछड़ रही भारतीय टीम ने शानदार वापसी की। आखिरकार जर्मनी को 5-4 से हराया। गौरतलब है कि इससे पहले भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने साल 1980 में मॉस्को ओलंपिक्स में स्वर्ण पदक जीता था। इस बार 41 साल बाद भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने सेमीफाइनल में जगह बनाई थी। हालांकि सेमीफाइनल में दुनिया की नंबर-2 टीम बेल्जियम ने भारत को हरा दिया था। 

मनप्रीत सिंह ने इनको समर्पित किया जीत
मैच के बाद कप्तान मनप्रीत सिंह ने कहा कि मैं नहीं जानता कि इस वक्त क्या कहूं। ये जबर्दस्त था। जो कोशिश की गई। हम खेल में 3-1 से पीछे थे। मुझे लगता है कि हम इस पदक को पाने के योग्य हैं। हमने बहुत मेहनत की ती। पिछले 15 महीने हमारे लिए काफी मुश्किल थे। हम बेंगलुरु में थे। हम में से कई लोगों को कोविड हो गया था। हम इस पदक को कोरोना महामारी में लोगों की जान बचाने वाले डॉक्टर्स और फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मियों को समर्पित करना चाहते है। 

जालंधर के रहने वाले हैं मनप्रीत सिंह
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 29 वर्षीय मनप्रीत पंजाब के जालंधर से आते हैं। जर्मनी से मिली चुनौती को लेकर मनप्रीत ने कहा कि बहुत मुश्किल था। उनको आखिरी 6 सेकेंड में पेनल्टी कॉर्नर मिल गया। हमने सोचा कि हमें किसी भी हाल में उनको रोकना है। ये वाकई कठिन था। मेरे पास अब शब्द नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हमें लंबे समय से कोई पदक नहीं मिला था। अब हमारा आत्मविश्वास बढ़ गया है। हम ये कर सकते हैं। अगर हम ओलंपिक्स में ऐसा कर सकते हैं तो कहीं भी कर सकते हैं। मनप्रीत सिंह का परिवार खुशियां मना रहा है। भारतीय टीम खुशियां मना रही हैं।