द फॉलोअप टीम, भीलवाड़ा:
राजस्थान में आज भी बाल विवाह और आटा-साटा जैसी कुप्रथाओं ने कइयों की जिंदगी बर्बाद कर रखी है। ताजा मामला आया है भीलवाड़ा के मांडल थाना क्षेत्र से। क्या है पूरी कहानी आइये जानते है। दरअसल यहां से एक मंदिर में गैंगरेप का मामला सामने आया था, जो झूठा निकला। 13 साल की नाबालिग ने अपने गैंगरेप की कहानी बना कर बताई थी। ऐसा उसने आटा-साटा जैसी कुरीति से परेशान होकर किया। आटा-साटा से बने रिश्ते से वह काफी परेशान थी। से नाबालिग का मामा उसके साथ मारपीट कर रहा था। 10 अगस्त की रात को मंदिर के पास एक बरगद के नीचे जाकर सो गई। दूसरे दिन उसने अपने गैंगरेप की कहानी सबको सुनाई।
मामा ने मामला दर्ज कराया था
पुलिस ने बताया कि 11 अगस्त को नाबालिग के मामा ने ही गैंगरेप का मामला दर्ज करवाया था। जब बच्ची का मेडिकल करवाया गया तो दुष्कर्म की बात झूठी निकली। फ़िलहाल लड़की को सखी सेंटर ले जाया गया है। पूछताछ में नाबालिग ने अपना दर्द बयां किया है। उसने बताया कि 10 साल पहले उसके माता-पिता की मौत हो गयी। वह अपने नानी घर में ही रह रही थी। नाबालिग की और उसके मामा की शादी आटा-साटा प्रथा से थी। मामा, नाबालिग को उसके ससुराल भेजने का दबाव बना रहा था। लड़की ने ससुराल जाने से मना कर दिया था। इस कारण से लड़की के ससुराल वाले उसकी मामी को भी उसके मामा के पास नहीं भेज रहे थे। मामा को काफी गुस्सा था। उसने कई बार उसके साथ मारपीट भी की।
मामा करता था अश्लील हरकतें
पूछताछ में पीड़िता ने बताया कि उसके 4 मामा हैं। इसमें से एक मामा उसके साथ अश्लील हरकतें करता था। 10 अगस्त जब उसके एक मामा ने मारपीट की किया तो वह गुस्से में मंदिर में जाकर सो गई। सुबह उसने गैंगरेप की कहानी बनाकर सबको सुनाई। गैंगरेप का आरोप में पुलिस ने 3 लोगों को हिरासत में लिया था क्योंकि दो युवकों ने नाबालिग के साथ 2 दिन पहले छेड़छाड़ की थी। पुलिस ने बताया कि गैंगरेप के आरोप के बाद इलाके में संप्रदायिक माहौल बिगाड़ने की कोशिश भी की गयी। पुलिस सभी लोगों को चिन्हित कर रही है। जल्द ही सबके खिलाफ कार्रवाई होगी। अब बाल कल्याण ही पीड़िता के रखरखाव करेगी।

क्या होता है आटा-साटा पहले ये जानिये
बाल विवाह के साथ एक और कुप्रथा चली आ रही है जो आटा–साटा है जिसके परिणामों से समाज में बहुत गलत कार्य हो रहे है। आटा–साटा एक कुरीति है जिसको हम इस प्रकार समझ सकते है की किसी की बहन की शादी किसी लड़के से कर रहे है तो लड़की के ससुराल वालों की जिम्मेदारी होगी दुल्हन के भाई की शादी करवाना। सीधे-सीधे शब्दों में समझें तो लडकी के बदले लडकी लेना और देना एक आटा–साटा है। राजस्थान के सभी क्षेत्रों में यह कुरीति है जिसको एक बाल विवाह के साथ जोड़ा जा सकता है क्योंकि आटा–साटा बाल विवाह में बहुत होता है।
पिछड़े समाजों में ज्यादा फैली है ये कुप्रथा
आटा–साटा मुख्य रूप से पिछडे वर्ग और दलित वर्ग में हो रहे है। जिसके मुख्य कारण लडकी की शादी को माता पिता द्वारा अपने उपर बोझ समझना, शिक्षा का अभाव, रूढ़िवादी अंधविश्वास, निम्न आर्थिक हालात। सबसे ज्यादा आटा–साटा के कारण यह है कि लडकी के परिवार में डर कि उनके लडके की शादी नहीं होगी क्योकि आजकल भारतीय समाज में एक सच है यदि आप गरीब और पिछड़े है तो आपके लडके की शादी नही होगी ! ये काफी दुर्भाग्यपूर्ण है।