द फॉलोअप टीम, पटना:
बिहार विधानसभा चुनाव से कुछ ही दिन पहले अपने डीजीपी के पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले गुप्तेश्वर पांडे तो आपको याद ही होंगे। हां हां वही गुप्तेश्वर पांडे जिन्होंने सुशांत सिंह राजपुर प्रकरण से खूब सुर्खियां बटोरी थी। 1987 बैच के चर्चित आईपीएस और बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय की अलग कहानी है। बेबाक बयान और अंदाज से वह चर्चा में बने रहते हैं। पॉलिटक्स हो या फिर बॉलीवुड सब में माहिर हैं। उनके दिए त्यागपत्र के बाद उन्होंने जदयू से नाता जोड़ा था।
बिहार सरकार में महत्वपूर्ण पद की आस थी
कयास लगाए जा रहे थे कि वे विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे और उन्हें अगली सरकार में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलेगी । लेकिन इन दोनो में से कोई भी बात सच न हुई। लेकिन अब सवाल यह उठता है कि गुप्तेश्वर पांडे जिनकी चर्चा बंद हो गयी है उसकी चर्चा यहां क्यों कर रहे हैं। इस स्टोरी में आपको गुप्तेश्वर पांडे की नई लीला के विषय में जानकारी मिलेगी।
बिहार विधानसभा चुनाव में नहीं मिला था टिकट
दरअसल पूर्व डीजीपी इन दिनों धार्मिक मंचों पर कथावाचन कर लोगों को जीवन का मर्म समझा रहे हैं। वह हनुमान की भक्ति में लीन हैं। भाव भी बदल गया है। पूर्व डीजीपी अब पूरी तरह बदल चुके हैं। सुबह से लेकर शाम तक भजन का सिलसिला जारी रहता है। वह खुद को अब मोह-माया से मुक्त बता रहे हैं कर लोगों को भी यही सीखा रहे हैं। गेरुआ वस्त्र में में उनका नया रूप फिर से सुर्खियां बटोर रहा है। नेता बनने के चक्कर में डीजीपी साहब ने इस्तीफा तो दे दिया था लेकिन अफ़सोस ये रहा कि उनको टिकट ही नहीं मिला। अब वो कथावाचक बन गये हैं।
गानों के अल्बम में एक्टिंग भी कर चुके हैं पांडेय जी
गुप्तेश्वर पांडेय का एक वीडियो अयोध्या से सामने आया है। 16 जून को इन्होंने यह प्रवचन दिया था। प्रवचन में इन्होंने भगवान के अस्तित्व की चर्चा की थी कि उन्हें कैसे देखा जा सकता है, उन्हें देखने का साधन क्या हो सकता है। लोग गुप्तेश्वर पांडेय का यह रूप देखकर आश्चर्य कर रहे हैं। इस तरह का यह पहला रूप नहीं है। इससे पहले वो गायक के रूप में भी दिख चुके हैं। भगवान भोलेनाथ पर इनका एल्बम भी आ चुका है और उसमें एक्टिंग भी कर चुके हैं। हाल में मथुरा और वृंदावन की भी यात्रा की थी। बिहार में भी कई जिलों के धार्मिक आयोजनों में पहले भी शामिल होते रहे हैं। 16 जुलाई से उनका वृंदावन में कार्यक्रम निर्धारित है, जहां भागवत कथावाचन करेंगे।